कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी पर विवाहेतर संबंध रखने का आरोप लगाता है तो स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। तलाक की कार्यवाही के दौरान इसे अदालत की कल्पना पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। मामले में अदालत जिस जोड़े की सुनवाई कर रही थी, उसकी शादी 2013 में हुई थी।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि अगर पति-पत्नी के बीच होने वाले छोटे-छोटे झगड़ों को तलाक कानूनों के तहत क्रूरता के रूप में देख जाएगा तो कई विवाह टूट जाएंगे। हर कोई इस आधार पर तलाक मांगने लगेगा। न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति शिव शंकर प्रसाद की खंडपीठ ने गाजियाबाद के रोहित चतुर्वेदी की ओर से दाखिल तलाक वाली याचिका को सीधे अनुमति देने के बजाय अलग रह रहे एक विवाहित जोड़े को न्यायिक रूप से अलग होने का निर्देश देते हुए यह टिप्पणी की है।
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कोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपने जीवनसाथी पर विवाहेतर संबंध रखने का आरोप लगाता है तो स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए। तलाक की कार्यवाही के दौरान इसे अदालत की कल्पना पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। मामले में अदालत जिस जोड़े की सुनवाई कर रही थी, उसकी शादी 2013 में हुई थी। पति ने आरोप लगाया कि उसकी पत्नी ने शादी निभाने से इन्कार कर दिया और उसके माता-पिता से लड़ाई की। एक बार पत्नी ने उसे चोर कहकर उसका पीछा करने के लिए भीड़ को उकसाया। उसके खिलाफ दहेज का मामला भी दायर करवाया है।
याचिका में कहा गया कि दंपती जुलाई 2014 तक साथ रहे लेकिन उसके बाद से साथ नहीं हैं। बाद में पति ने पत्नी द्वारा क्रूरता का हवाला देते हुए परिवार न्यायालय से तलाक मांगा।
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इस बीच पत्नी ने पति पर उसकी भाभी के साथ अवैध संबंध होने का आरोप लगाया। एक पारिवारिक अदालत द्वारा तलाक के लिए पति की याचिका को अनुमति देने से इन्कार करने के बाद उसने हाईकोर्ट के समक्ष अपील दायर की।