याची के अधिवक्ता का कहना था कि उसे सुधार का एक मौका मिलना चाहिए। विश्वविद्यालय ने याची को सुधार का अवसर दिए बिना सिर्फ दंडात्मक कार्रवाई की है। ऐसा करके इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा नारायण मिश्रा बनाम यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य मुकदमों में दिए गए आदेश का पालन नहीं किया। इससे छात्र का पूरा भविष्य खराब हो गया है। साथ ही कानून के राज पर भी चोट है। यूजीसी के अधिवक्ता विमलेंदु त्रिपाठी का कहना था कि विश्वविद्यालय अदालत के आदेश और यूजीसी की गाइडलाइन का पालन करने के लिए बाध्य है। छात्र को परीक्षा में बैठने की अनुमति दे दी गई है।
यूजीसी के अधिवक्ता रिजवान अली अख्तर का कहना था कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में यूजीसी ने 12 अक्तूबर 2023 को गाइडलाइन जारी कर दी है। बताया कि यूजीसी ने बीएचयू के साथ बैठक कर छात्रों के सुधार की योजना लागू करने और इसे विश्वविद्यालय के परिनियमों में शामिल करने पर चर्चा की है। कोर्ट ने दलील सुनने के बाद याची रौनक मिश्रा के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई को रद्द करते हुए उसे नियमित छात्र के रूप में विश्वविद्यालय जाने का निर्देश दिया है।
सरकार और विश्वविद्यालय को निर्देश
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, यूजीसी और विश्वविद्यालय को निर्देश दिया है कि सरकार अपने क्षेत्राधिकार वाले विश्वविद्यालयों में यूजीसी की गाइडलाइन लागू करवाए। साथ ही सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में भी इसे यूजीसी के साथ मिलकर लागू किया जाए। जागरूकता के लिए कार्यशालाओं व्याख्यानों का आयोजन किया जाए।