इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूस्वामियों को सुनवाई का मौका दिए बिना मुआवजा तय करना अवैध है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने देवरिया में राष्ट्रीय राजमार्ग-727बी (सलेमपुर बाईपास) निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा निर्धारण के अवार्डों को रद्द कर दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूस्वामियों को सुनवाई का मौका दिए बिना मुआवजा तय करना अवैध है। इस टिप्पणी संग कोर्ट ने देवरिया में राष्ट्रीय राजमार्ग-727बी (सलेमपुर बाईपास) निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण से संबंधित मुआवजा निर्धारण के अवार्डों को रद्द कर दिया है। साथ ही नए सिरे से विचार के लिए सक्षम प्राधिकारी के पास भेज दिया है।
विज्ञापन
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी, न्यायमूर्ति कुणाल रवि सिंह की खंडपीठ ने मनोज कुमार बरनवाल व अन्य सहित नौ याचिकाओं पर दिया है। याचियों का कहना था कि उनकी भूमि के अधिग्रहण के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम-1956 की धारा 3जी(3) के तहत मुआवजा निर्धारण से पूर्व दावे आमंत्रित करने की अनिवार्य सार्वजनिक सूचना दो स्थानीय समाचार पत्रों में प्रकाशित नहीं की गई। इससे उन्हें अपना दावा प्रस्तुत करने का अवसर नहीं मिला।
दूसरी ओर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण और राज्य सरकार ने दलील दी कि 28 दिसंबर 2023 को दो समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित हुई थी, लेकिन उसमें लिपिकीय त्रुटि के कारण धारा 3जी(3) का उल्लेख नहीं हो सका। कोर्ट ने कहा कि यदि प्रकाशन में त्रुटि थी तो उसका शुद्धिपत्र जारी किया जाना चाहिए था।
विज्ञापन
कोर्ट ने 15 फरवरी 2024 सहित विभिन्न तिथियों के मुआवजा अवार्ड निरस्त करते हुए सक्षम प्राधिकारी, उपजिलाधिकारी सलेमपुर बाईपास, देवरिया को निर्देश दिया कि धारा 3जी(3) के अनुरूप नई सार्वजनिक सूचना जारी कर प्रभावित भूस्वामियों को दावे प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाए। साथ ही कहा कि परियोजना की प्रगति या अधिकांश भूस्वामियों की ओर से मुआवजा स्वीकार कर लेने से वैधानिक प्रक्रिया के उल्लंघन को वैध नहीं ठहराया जा सकता।