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High Court : फर्जीवाड़े के आरोपी मदरसा शिक्षकों की याचिका खारिज, एसआईटी ने दर्ज कराई थी एफआईआर

Wed, 29 Jul 2026 08:04 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 2.14 लाख रुपये के गबन के आरोपी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने किरण पाल व अन्य की याचिका पर दिया है।
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अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए सभी आरोपियों को सुनाई आजीवन कारावास की सजा - फोटो : अमर उजाला
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ में मदरसा आधुनिकीकरण योजना के तहत 2.14 लाख रुपये के गबन के आरोपी शिक्षकों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इन्कार कर दिया। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर, न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने किरण पाल व अन्य की याचिका पर दिया है।

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मामला आजमगढ़ के अतरौलिया थाना क्षेत्र स्थित मदरसा फैजकुशर निस्वान (रुकुलमलपुर) से जुड़ा है। अपराध अनुसंधान विभाग (सीबीसीआईडी) की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) के इंस्पेक्टर कुंवर ब्रह्म प्रकाश सिंह ने 19 मार्च 2025 को मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच के दौरान एसआईटी ने पाया था कि पोर्टल पर मदरसे में 53 छात्र-छात्राएं दर्ज थे, जबकि मौके पर एक भी विद्यार्थी मौजूद नहीं था। साथ ही पोर्टल के मुताबिक मदरसे में 300 वर्गफीट के तीन कमरे और 150 वर्गफीट का कार्यालय दर्शाया गया था, जबकि निरीक्षण के दौरान वहां केवल एक रिहायशी मकान मिला, जो तय मानकों के विपरीत था। इसके अलावा वहां किरण पाल, रेनू यादव और अनवर अहमद के नाम के तीन शिक्षकों की तैनाती दर्शायी गई थी।

एफआईआर रद्द करने की मांग के साथ याचियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उनके अधिवक्ता ने दलील दी कि मदरसे में गणित, अंग्रेजी और हिंदी पढ़ाने के लिए जुलाई 2012 में अस्थायी रूप से नियुक्त किए गए थे। उन्हें सरकार से मिलने वाला मानदेय नियमानुसार मिला हुआ था। उन्होंने किसी प्रकार का गबन नहीं किया है। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। कहा कि एसआईटी की जांच में यह आरोप सामने आया है कि सरकारी धन का गबन शिक्षकों के नाम का उपयोग करके किया गया। ऐसे में इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि याचिकाकर्ता पूरी तरह निर्दोष हैं या एफआईआर में कोई अपराध नहीं बनता। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह यह नहीं कह रही कि आरोप सिद्ध हो चुके हैं, लेकिन आरोप गंभीर हैं और उनकी गहन जांच जरूरी है।

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