बेटियाें की ओर से दाखलि भरण पोषण का मुकदमा जारी है। पारिवारिक न्यायालय के 12 सितंबर 2017 के आदेशानुसार नवीन को 42000 रुपये प्रतिमाह व 19 जुलाई 2022 के आदेश से 50,000 रुपये प्रतिमाह बेटियों व पत्नी को अदा करना था। इसके खिलाफ नवीन ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दाखिल की थी, जो 16 अक्तूबर 2023 को खारिज हो गई।
याची किरन वर्मा की दलील है कि 2017 से 2019 तक नवीन ने भरण पोषण की मद में कोई भुगतान नहीं किया। वह पिता के सहारे जीवनयापन कर रही हैं। बेटियां बड़ी हो गई हैं। स्कूल की फीस और अन्य खर्चे बढ़ गए हैं। नवीन की ओर से प्रतिवाद करते हुए दलील दी गई कि कोर्ट के आदेश के अनुपालन में 26,4000 रुपया अदा किया जा चुका है। पत्नी किरन एमबीए, बीएड जैसी उच्च डिग्रीधारक हैं। वह सोशल मीडिया पर रील्स बनाकर आमदनी कर रही हैं। साथ ही प्राइवेट स्कूल में पढ़ाती हैं।
कोर्ट ने नवीन की दलीलों को सिरे से खारिज कर किरन वर्मा की भरण पोषण की बकाया राशि की मांग वाली अर्जी स्वीकार कर ली। कोर्ट ने आदेश दिया है कि नवीन वर्मा को भरण पोषण का बकाया 1140000/-रुपये का भुगतान 200000-200000/-रुपये की पांच किस्तों में व शेष 140000/-रुपये छठीं किस्त के रूप में अदा करना होगा। इस दौरान पूर्व निर्धारित 50000/-रुपये की मासिक किस्त का भुगतान भी करते रहना होगा।
ससुर बोले-हवाई यात्रा का खर्च दामाद को वापस किया जा चुका
किरन के पिता सभाजीत वर्मा का कहना है कि 2012 में अमेरिका यात्रा के एयर टिकट का 1,40,000 रुपये दामाद नवीन को वापस किया जा चुका है। भरण पोषण का मुकदमा लंबित रहने के दौरान बेटी के खिलाफ नवीन ने तलाक और गार्जियन एंड वार्ड एक्ट तहत एकतरफा मुकदमा सुल्तानपुर की अदालत मेें दाखिल किया था। हाईकोर्ट के आदेश पर दोनों मामले इलाहाबाद जिला अदालत मेंं स्थानांतरित होने के बाद नवीन ने मुकदमे वापस ले लिया। कोर्ट ने उस पर 20000/-रुपये का हर्जाना भी लगाया।