इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ठेकेदार पर प्रतिबंध से जुड़े विवाद के बीच बकाया भुगतान को लेकर याचिका पर उसे संशोधन अर्जी दाखिल करने की अनुमति दी है। राज्य सरकार को पूरक हलफनामे पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन, न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने राज कुमार व अन्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
मामला अलीगढ़ विकास प्राधिकरण से जुड़ा है। याची की ओर से दलील दी गई कि उसे 13 कार्यों के लिए कार्य आदेश (वर्क ऑर्डर) दिए गए थे। बाद में अधिकारियों ने यह कहते हुए हस्तक्षेप किया कि याची ने आवेदन में नौ जनवरी 2025 को लगाए गए प्रतिबंध आदेश का उल्लेख नहीं किया था।
कोर्ट ने पिछली सुनवाई में यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि जब अलीगढ़ विकास प्राधिकरण ने 28 अक्तूबर 2025 को उक्त प्रतिबंध आदेश वापस ले लिया था तो उसके बाद जारी टेंडरों पर उसका क्या प्रभाव पड़ेगा। इस पर स्थायी अधिवक्ता ने दलील दी कि जिन वर्क ऑर्डरों के भुगतान की मांग की गई है, वे सभी 28 अक्तूबर 2025 के बाद जारी हुए हैं।
याची के अधिवक्ता ने पूरक हलफनामा दाखिल कर दलील दी कि चार टेंडरों का कार्य पूरा कर लिया गया है। इसके लिए करीब 97,91,007 रुपये के शेष भुगतान की मांग करते हुए पांच मार्च 2026 को प्राधिकरण को आवेदन भी दिया गया है।
इस पर राज्य की ओर से कहा गया कि पहले यह सत्यापित किया जाएगा कि कार्य अनुबंध की शर्तों और मानकों के अनुसार पूरा हुआ है या नहीं। प्राधिकरण के अधिवक्ता ने दलील दी कि 28 अक्तूबर 2025 को प्रतिबंध हटाने वाला आदेश बाद में 22 दिसंबर 2025 को निरस्त कर दिया गया था, जिसे याची ने अभी चुनौती नहीं दी है। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि 22 दिसंबर 2025 का आदेश बिना नोटिस और सुनवाई का अवसर दिए पारित किया गया है, इसलिए यह अवैध है।