इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हत्या के एक मामले में कहा कि शरीर के घाव व परिस्थितियां दर्शाती हैं कि हत्या पूर्व नियोजित नहीं थी। अदालत ने मामले को हत्या के बजाय गैर इरादतन हत्या के तहत माना और दोषियों की सजा को आजीवन कारावास से घटाकर उनकी अब तक जेल में काटी गई अवधि में बदल दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति जय कृष्ण उपाध्याय की खंडपीठ ने दिया है।
मामला आठ जुलाई 2016 का है, जब शाहजहांपुर के थाना रोजा क्षेत्र में विशाल सिंह नामक युवक की हत्या कर दी गई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी की बेटी के साथ विशाल के प्रेम संबंध थे और विशाल ने आरोपी को रुपये उधार दिए थे। जब विशाल ने अपने पैसे वापस मांगे तो आरोपियों ने उसे पैसे लेने के बहाने बुलाया और उसकी हत्या कर दी।
मामले में ट्रायल कोर्ट ने आरोपी, उसकी पत्नी, बेटी और दो बेटों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। आरोपियों के अधिवक्ता ने दलील दी कि विशाल ने अपीलकर्ता की बेटी के साथ दुष्कर्म का प्रयास किया था और आत्मरक्षा में हुई हाथापाई के दौरान दुर्घटनावश गोली चलने से उसकी मौत हुई थी।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि उक्त घटना अचानक उपजे विवाद का नतीजा थी। यह मामला गैर इरादतन हत्या के तहत आता है, जो अचानक हुए झगड़े में बिना किसी पूर्व योजना के की गई कार्रवाई से संबंधित है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने आरोपियों की सजा को जेल में बिताई गई अवधि तक सीमित रखते हुए उन्हें बरी कर दिया।