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हाईकोर्ट की टिप्पणी : पति-पत्नी के अंतरंग क्षणों की जांच करना अदालत का काम नहीं, तलाक मंजूरी का आदेश रद्द

Wed, 30 Oct 2024 11:54 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

Allahabad High Court News : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक क्रूरता की पराकाष्ठा पार न हो जाए तब तक अदालतें पति पत्नी के अंतरंग क्षणों की जांच नहीं कर सकती। उनके गोपनीय क्षणों का पता लगा कर फैसला देना अदालत का काम नहीं है।
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अदालत। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि जब तक क्रूरता की पराकाष्ठा पार न हो जाए तब तक अदालतें पति पत्नी के अंतरंग क्षणों की जांच नहीं कर सकती। उनके गोपनीय क्षणों का पता लगा कर फैसला देना अदालत का काम नहीं है।

इस टिप्पणी के साथ न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति डोनाडी रमेश की खंडपीठ ने तलाक की मंजूरी के खिलाफ दाखिल पत्नी की अपील स्वीकार कर ली। साथ ही पति पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। मामला फिरोजाबाद जिले का है। 1999 में विवाहित जोड़े के बीच महज 11 महीने में विवाद उत्पन्न हो गया।

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पति ने पारिवारिक न्यायालय में क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्जी दाखिल की जो 2015 में मंजूर हुई। पत्नी ने इसके खिलाफ हाइकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। पत्नी के अधिवक्ता ने दलील दी कि विवाह विच्छेद के लिए हिंदू विवाह अधिनियम के अंतर्गत विवाह के एक वर्ष के भीतर पति की ओर से दाखिल अर्जी पोषणीय नहीं है।

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कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम के तहत शादी के एक साल के भीतर तलाक की याचिका की अनुमति नहीं है। क्योंकि, हिंदू विवाह को भंग करने की कार्रवाई का कारण विवाह के पहले वर्ष के भीतर तलाक की नौबत तब तक नहीं आ सकती, जब तक किसी भी पक्ष की ओर से क्रूरता की पराकाष्ठा पार न हो जाए।

ऐसा होता है तो उस मामले में भी विशेष परिस्थितियों का जिक्र करते हुए विशिष्ट अर्जी दाखिल की जानी होगी। जबकि मौजूदा मामले में ऐसी कोई बात उजागर नहीं होती। कोर्ट ने पारिवारिक न्यायालय के अभिलेखों के अवलोकन में पाया कि पारिवारिक न्यायालय ने पत्नी की आपत्तियों को नजरंदाज करते हुए पत्नी के आचरण पर पति की ओर से लगाए गए आक्षेपों पर ही विचार किया था।

कोर्ट ने पत्नी की अपील स्वीकार कर ली। पारिवारिक न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। साथ ही पति की ओर से भरण पोषण की मद से पत्नी को अदा की गई ढाई लाख रुपये की धनराशि को ब्याज समेत लोग लौटने का भी आदेश दिया। वहीं, पत्नी को बेवजह मुकदमेबाजी में घसीटने के लिए पति पर पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।

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