156 (3) के तहत दिया जा सकता है प्रार्थना पत्र
मोहसिन का दोस्त फारुख भी इस मामले में शामिल था। सेठ कृष्ण कुमार के घर फारुख और उसके सह-अभियुक्त मोहसिन ने डकैती डाली थी। इसमें कृष्ण कुमार और उनकी पत्नी की हत्या कर दी गई। जब याची का बेटा फारुख, कृष्ण कुमार की इनोवा गाड़ी में लूटी गई नकदी और गहने लेकर भाग रहा था, तो पुलिस ने उसे चुनौती दी। इस पर उसने पुलिस पर गोली चलाई। पुलिस ने बचाव में उस पर गोली चलाई जिसमें उसकी मौत हो गई। गाड़ी से उसके कब्जे से लूटा गया सामान व नकदी बरामद की गई। साथ ही यह भी प्रस्तुत किया गया कि याचिकाकर्ता के मृत बेटे का आपराधिक इतिहास था।
उच्च न्यायालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा, एफआईआर दर्ज न होने पर 154(3) के तहत एसपी के यहां प्रार्थना पत्र देना चाहिए। फिर भी एफआईआर दर्ज नहीं होती तो 156(3) के तहत मजिस्ट्रेट के पास प्रार्थना पत्र दिया जा सकता है। सीआरपीसी की धारा 200 के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करने का भी प्रावधान है। कोर्ट ने कहा, एफआईआर दर्ज कराने के इतने वैकल्पिक उपाय हैं तो याचिका पर विचार क्यों किया जाए। मामले में हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। याची नियमानुसार एसपी या मजिस्ट्रेट से एफआईआर दर्ज कराने के लिए संपर्क कर सकता है।