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High Court : गैर-संज्ञेय अपराध में पुलिस चार्जशीट पर लिया संज्ञान रद्द,  न्यायिक प्रक्रिया का पालन जरूरी

Thu, 13 Aug 2026 03:50 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-संज्ञेय अपराधों से जुड़े मामलों में पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की चार्जशीट को राज्य सरकार का मुकदमा नहीं, बल्कि शिकायत केस माना जाना चाहिए।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट। - फोटो : अमर उजाला।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गैर-संज्ञेय अपराधों से जुड़े मामलों में पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में पुलिस की चार्जशीट को राज्य सरकार का मुकदमा नहीं, बल्कि शिकायत केस माना जाना चाहिए। इस प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया संज्ञान कानूनन सही नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकल पीठ ने कौशाम्बी के संदीपनघाट थाना क्षेत्र के मामले में शिव नरेश की याचिका पर दिया।

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आरोपी के खिलाफ धमकी, मारपीट, अपमान करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज किया गया था। पुलिस ने 29 दिसंबर 2025 को चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद ग्राम न्यायालय चायल के न्यायाधिकारी ने 19 फरवरी 2026 को संज्ञान लेते हुए आरोपी को समन जारी किया।

आरोपी की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि सभी धाराएं गैर-संज्ञेय हैं। इसलिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 2(1)(एच) के तहत पुलिस रिपोर्ट को शिकायत माना जाना चाहिए था। हाईकोर्ट ने दलील स्वीकार करते हुए संज्ञान आदेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि पुलिस रिपोर्ट दाखिल करने वाले जांच अधिकारी को शिकायतकर्ता माना जाएगा। हालांकि, अदालत ने नियमानुसार मामले को शिकायत केस के रूप में आगे बढ़ाने की छूट दी है। 

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