सहारनपुर की शराब निर्माता कंपनी को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राहत दे दी है। हाईकोर्ट ने आबकारी सचिव और आबकारी आयुक्त द्वारा कंपनी के निरस्त किए गए लाइसेंस के आदेश को रद्द करते हुए याचिका स्वीकार कर ली। कोर्ट ने माना कि आबकारी सचिव और आयुक्त का आदेश एकतरफा है। यह आदेश न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी ने मेसर्स को-ऑपरेटिव कंपनी लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि मामले में कोई जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। केवल कुछ तथ्यों का सारांश प्रस्तुत किया गया है। याची के अधिवक्ता नामित श्रीवास्तव ने तर्क दिया कि आबकारी विभाग ने केवल एफआईआर के आधार पर कंपनी का लाइसेंस निरस्त किया है। जबकि, मामले में न तो कोई जांच की गई और न ही लाइसेंस निरस्त करते समय याची को सुनवाई का मौका दिया गया है।
पुलिस ने कंपनी परिसर के बाहर ट्रक में शराब पकड़ी थी। जवाब में प्रतिवादी के अधिवक्ता ने कहा कि पकड़ी गई शराब से राजस्व को हानि हुई है। यह शराब कंपनी परिसर के गेट के बाहर ही पकड़ी गई। कोर्ट ने प्रतिवादी केतर्कों को दरकिनार कर दिया। कहा कि आबकारी आयुक्त और आबकारी सचिव का आदेश कायम रखने के योग्य नहीं हेैं। मामला सहारनपुर जिले का है। शराब बनाने वाली कंपनी 2010 से पंजीकृत है।
कुछ दिनों पहले कंपनी परिसर के गेट से एक ट्रक शराब पुलिस ने पकड़ी थी। मामले में कंपनी ने आबकारी आयुक्त और आबकारी सचिव के समक्ष राहत पाने के लिए अनुरोध किया था, लेकिन विभाग ने उसका शराब बनाने का लाइसेंस रद्द कर दिया था। याची ने लाइसेंस रद्द करने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने कंपनी की याचिका स्वीकार कर ली।