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हाईकोर्ट बना छावनी, बार के पदाधिकारियों को भी परिसर में नहीं करने दिया गया प्रवेश

Wed, 12 Jan 2022 12:53 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
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allahabad highcourt - फोटो : prayagraj
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 कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए हुए हाईकोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है। हाईकोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार गेट नंबर तीन को छावनी में तब्दील कर दिया गया। मंगलवार को बार पदाधिकारियों को भी कोर्ट परिसर में प्रवेश नहीं करने दिया गया। अंदर जाने को लेकर बार के सदस्यों की पुलिस से नोकझोंक हुई। बाद में दोनों पक्षों ने बातचीत कर मामला शांत कर लिया। 
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सोमवार को अधिवक्ताओं की नाराजगी को देखते हुए हाईकोर्ट के मुख्य प्रवेश द्वार गेट नंबर तीन के साथ मुख्य मार्ग पर सुरक्षा व्यवस्था मंगलवार को ज्यादा नजर आई। सीआरपीएफ  के जवानों के साथ पुलिस की मौजूदगी अधिक रही। दोपहर तीन बजे के बाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, महासचिव के साथ अन्य पदाधिकारी एकत्र होकर अंदर जाने लगे, लेकिन उन्हें रोक दिया गया।


मौके पर मौजूद पुलिस अफसरों ने कहा उन्हें अंदर जाने की अनुमति नहीं दी गई है। अध्यक्ष और महासचिव ने कहा कि सोमवार को हाईकोर्ट प्रशासनिक कमेटी को सूचित कर दिया गया था कि बार एसोसिएशन की कार्यकारिणी अपने कार्यालय में रोजाना तीन बजे उपस्थित होकर अपने कार्यों का निस्तारण करेगी।
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पुलिस अफसरों ने कहा कि बार पदाधिकारियों को अंदर जाने के लिए महानिबंधक को सूचित किया गया है। अगर, उनकी अनुमति मिलेगी तभी अंदर जाने दिया जाएगा। बार पदाधिकारियों ने भी महानिबंधक से मोबाइल फोन पर इस मसले पर बातचीत की। लेकिन, हाईकोर्ट प्रशासन की ओर से शाम चार बजे तक कोई आदेश नहीं आया तो पदाधिकारी वहां से चले गए । 

फिजिकल सुनवाई किए जाने के लिए अधिवक्ताओं ने शुरू किया अनशन

हाईकोर्ट में वर्चुअल के साथ फिजिकल सुनवाई भी किए जाने की मांग को लेकर मंगलवार से हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व संयुक्त सचिव प्रशासन अभिषेक शुक्ला और पूर्व संयुक्त सचिव संजीव सिंह की अगुवाई में अनशन शुरू कर दिया गया। अनशनकारियों का कहना था कि केवल वर्चुअल सुनवाई होने से अधिवक्ता समाज नाराज है। उनका अनशन फिजिकल सुनवाई शुरू होने तक जारी रहेगा।

उनके आंदोलन के समर्थन में जय प्रकाश तिवारी, इंदीवर पांडेय, राकेश तिवारी, राहुल सिंह, भारतेंदु पाठक, देवधर त्रिपाठी, गिर्राज सिंह, अवनीश कुमार पाठक, सर्वेश्वरी प्रसाद, रामानुज तिवारी, पुनीत शुक्ला, राजेश यादव, राखी कुमारी आदि अधिवक्ता भी मौजूद रहे। 
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