पूर्व अध्यक्ष ने अध्यक्ष और महासचिव को पत्र लिखकर कहा है कि यदि संशोधन कानून के तहत चिकित्सा सहायता का वितरण किया गया तो यह बार के धन का गबन होगा और कोई भी सदस्य इस गबन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्वतंत्र होगा।
इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष राधाकांत ओझा ने वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा बाईलाज की धारा 54 में किए गए संशोधन को शून्य एवं अवैधानिक करार दिया है। पूर्व अध्यक्ष ने अध्यक्ष और महासचिव को पत्र लिखकर कहा है कि यदि संशोधन कानून के तहत चिकित्सा सहायता का वितरण किया गया तो यह बार के धन का गबन होगा और कोई भी सदस्य इस गबन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के लिए स्वतंत्र होगा।
विज्ञापन
पूर्व अध्यक्ष ने बार के दोनों पदाधिकारी से अनुरोध किया है कि बार के धान का दुरुपयोग करने से बचे। ताकि, भ्रष्टाचार को बढ़ावा ना मिले। पूर्व अध्यक्ष ओझा का कहना है चिकित्सा दावा, मृत्यु दावा 1915- 16 में शुरू हुआ। कार्यकारिणी ने नीति बनाकर धन वितरित किया था। जिसके लिए बाईलाज की धारा 54 में संशोधन किया था, जिससे कि किसी प्रकार से दुरुपयोग न होने पाए। उन्होंने वर्तमान कार्यकारिणी द्वारा आम सभा में प्रस्ताव के जरिए जो संशोधन का प्रयास किया है वह अवैध है।