हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव के लिए 20 फरवरी को अंतरिम मतदाता सूची जारी कर 26 फरवरी तक आपत्तियां आमंत्रित की गई थी। जिसके बाद 28 फरवरी को जारी हुई अंतिम मतदाता सूची में भी तमाम खामियां उजागर हुई थी।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन चुनाव के लिए नामांकन पत्रों की बिक्री के साथ मंगलवार से चुनाव प्रक्रिया की शुरुआत हो गई। उधर, मतदाता सूची से बाहर किए गए वकीलों के एक खेमे ने मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए जनहित याचिका दाखिल की है। याची वकीलों की ओर से त्वरित सुनवाई की गुजारिश की मुख्य न्यायधीश ने स्वीकार करते हुए बुधवार को सुबह 10 सुनवाई नियत की है।
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गौरतलब है कि हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव के लिए 20 फरवरी को अंतरिम मतदाता सूची जारी कर 26 फरवरी तक आपत्तियां आमंत्रित की गई थी। जिसके बाद 28 फरवरी को जारी हुई अंतिम मतदाता सूची में भी तमाम खामियां उजागर हुई थी। हालंकि, विरोध के सुरों को भांप कर हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने आनन फानन में फिर से सुधार कर सूची जारी की, लेकिन नई मतदाता सूची से तमाम ऐसे वकीलों के नाम गायब है जो हाईकोर्ट में सक्रिय रूप से वकालत कर रहे है और उनकी सदस्यता शुल्क भी जमा है।
नतीजा मतदाता सूची से वंचित हुए वकीलों में गहरा आक्रोश है। अक्रोशित वकीलों ने मतदाता सूची में हुई गड़बड़ी के खिलाफ जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। याची वकीलों का दावा है कि बार में लगभग 15 से 16 हजार सदस्य है। लेकिन मतदाता सूची में महज साढ़े नौ हजार वकीलों को ही मताधिकार दिया गया है।