इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में भगदड़ जैसी घटनाओं और भीड़ प्रबंधन के संबंध में डीएम से विस्तृत सुरक्षा प्लान मांगा है। साथ ही कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की नीति पर नाराजगी जताई है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा-वृंदावन में भगदड़ जैसी घटनाओं और भीड़ प्रबंधन के संबंध में डीएम से विस्तृत सुरक्षा प्लान मांगा है। साथ ही कोर्ट ने मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण की चुनिंदा लोगों पर कार्रवाई की नीति पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि समान परिस्थितियों में अलग-अलग कार्रवाई करना कानूनन स्वीकार्य नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने स्वामी शिव स्वरूपानंद जी महाराज की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। मामले की अगली सुनवाई 5 मई को दोपहर दो बजे होगी।
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याचिका में आरोप है कि प्राधिकरण ने 23 अवैध निर्माण चिह्नित किए, लेकिन कार्रवाई केवल कुछ पर ही की गई। इस पर कोर्ट ने प्राधिकरण के उपाध्यक्ष को निर्देश दिया कि अध्यक्ष से परामर्श कर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसमें सभी चिह्नित संपत्तियों पर की गई कार्रवाई का विवरण हो। साथ ही पिछले पांच वर्षों में अवैध निर्माण के मामलों और वर्तमान नीति की जानकारी भी मांगी गई है।
कोर्ट ने कहा कि अवैध निर्माण आपातकालीन राहत कार्यों में बाधा बनते हैं। साथ ही पूछा है कि क्या किसी विशेषज्ञ संस्था से वैज्ञानिक अध्ययन कराया गया है? विभागों के बीच समन्वय की क्या व्यवस्था है। कोर्ट ने जिलाधिकारी मथुरा से व्यापक भीड़ और संकट प्रबंधन योजना प्रस्तुत करने के लिए कहा है। इसके साथ नगर आयुक्त और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को भी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।