जेवर एयरपोर्ट के विस्तार का रास्ता साफ हो गया है। हाईकोर्ट ने अधिग्रहण प्रक्रिया को वैध माना है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि भूमि अधिग्रहण की पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार की गई है। इसमें हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। इसके साथ ही एयरपोर्ट के विस्तार के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं को निस्तारित कर दिया। हालांकि, कोर्ट ने प्रभावित परिवारों को राहत देते हुए कहा कि आबादी का कब्जा तभी लिया जाएगा, जब पुनर्वास स्थल पूरी तरह विकसित हो जाए। इन शर्तों का उल्लंघन होने पर इसे अदालत के आदेश की अवहेलना माना जाएगा।
यह आदेश न्यायमूर्ति महेश चंद्र त्रिपाठी व न्यायमूर्ति कुनाल रवि सिंह की खंडपीठ ने विजय पाल सिंह और 12 अन्य की याचिका पर दिया है। ग्रामीणों ने तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर कर अधिग्रहण नोटिफिकेशन को चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उनकी आबादी को हटाने की प्रक्रिया में भूमि अधिग्रहण कानून की अनिवार्य शर्तों का पालन नहीं किया गया है।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद कहा कि जेवर एयरपोर्ट का विस्तार राष्ट्रीय महत्व की परियोजना है। इससे क्षेत्र में रोजगार के बड़े अवसर पैदा होंगे। औद्योगिक विकास को गति मिलेगी और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य सरकार की ओर से एयरपोर्ट के विस्तार के लिए दूसरे चरण में 14 गांवों की लगभग 1857 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जा रही है।
इस परियोजना के लिए आवश्यक 70 प्रतिशत प्रभावित परिवारों की सहमति ली गई है। किसानों की आपत्तियों की सुनवाई की गई और उन्हें कारण सहित खारिज किया गया। इसलिए प्रक्रिया में किसी तरह की अवैधता नहीं है।