पीडीए ने कहा- नियमानुसार हुई है कार्रवाई
कहा कि आमतौर पर पीडीए किसी का घर गिराता है तो उस मकान के आगे का हिस्सा तोड़ दिया जाता है लेकिन अधिवक्ता का पूरा मकान गिराया गया। उस स्थान पर और भी मकान बने हैं लेकिन पीडीए ने किसी और के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। उन मकानों की भूमि की प्रकृति भी उसी तरह की है, जैसी अधिवक्ता के मकान की थी।
पीडीए की ओर से उपस्थित अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने कहा कि याची ने 2017 में निर्माण कराया था। पीडीए की ओर से नोटिस दिया गया था। याची ने मंडलायुक्त के यहां अपील दाखिल की। अपील खारिज हो गई। इसके बाद वह हाईकोर्ट आया तो कोर्ट ने उनसे स्वामित्व के कागजात दिखाने को कहा था, लेकिन याची अभी कागजात नहीं दिखा पाया।
इस पर कोर्ट ने पूछा कि जब केस सुनवाई पर था, उसके एक दिन पहले क्यों मकान गिरा दिया। इस पर पीडीए की ओर से कहा गया कि यह एक रूटीन कार्रवाई थी। लेकिन, कोर्ट ने इस दलील को नहीं माना और मंगलवार को पूरा ब्योरा तलब किया है।