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प्राइमरी का टीचर इंटर कॉलेज का प्रबंधक कैसे बना, सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच का आदेश

Sat, 15 Dec 2018 02:26 AM IST
शाहरुख खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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हाईकोर्ट ने देवरिया के बब्बन सिंह इंटर कॉलेज सतसिया में प्राइमरी स्कूल के अध्यापक को प्रबंधक बनाए जाने और सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच का आदेश प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को दिया है। 
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कोर्ट ने कहा क्या प्राइमरी स्कूल का अध्यापक या प्रधानाध्यापक किसी इंटर कॉलेज का प्रबंधक हो सकता है? क्या सरकारी खजाने से किसी प्राइवेट संस्था के व्यक्ति को कुप्रबंध के लिए धन दिया जा सकता है?

प्राइमरी अध्यापक पर आरोप लगाया गया है कि वह विद्यालय में पढ़ाने नहीं जाता है और वेतन ले रहा है तथा इंटर कॉलेज का प्रबंधक बना हुआ है। यह इंटर मीडिएट एक्ट के खिलाफ है। 
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कॉलेज के सेवानिवृत्त अध्यापक वासुदेव त्रिपाठी ने इस मामले में याचिका दाखिल की है। याचिका पर न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र सुनवाई कर रहे हैं। कोर्ट ने प्रमुख सचिव माध्यमिक शिक्षा को इस प्रकरण की जांच करने का आदेश दिया है। 
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उनसे यह भी पूछा है कि शिक्षा के मद में दिए जा रहे धन के दुरुपयोग पर किस प्रकार से रोक लगाएंगे। क्या सरकार शिक्षण संस्थाओं के सरकारीकरण पर विचार करेगी। प्रमुख सचिव को 16 जनवरी तक व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने कॉलेज के प्रबंधक और प्राइमरी पाठशाला खिधिन्या गोरखपुर के प्रधानाध्यापक से स्पष्टीकरण मांगा है कि क्यों ने उनके प्रबंधक के पद पर कार्य करने पर रोक लगा दी जाए। याची का कहना है कि 31 मार्च 2015 को वह सेवानिवृत्त हो गया। 

मगर उसकेसेवा परिलाभों का भुगतान नहीं किया जा रहा है। प्रबंधक ने याची को बर्खास्त कर दिया था मगर माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने इसे स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने याची को सेवानिवृत्त लाभ नौ प्रतिशत ब्याज के साथ देने का निर्देश दिया है।
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