गर्भवती होने पर भर्ती से वंचित युवती का टेस्ट लेकर नियुक्ति का आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपनी अंतर्निहित शक्तियों का प्रयोग कर प्रतियोगी महिला का अलग से टेस्ट लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने जेल वार्डर भर्ती 2018 में गर्भवती होने के कारण शारीरिक दक्षता परीक्षा देने में असमर्थ महिला अभ्यर्थी के लिए 16 मई से 20 मई के बीच तिथि तय कर टेस्ट लेने का निर्देश दिया है।
याची ने गर्भवती होने के कारण टेस्ट में बैठने में असमर्थ होने की सूचना दी थी और बाद में टेस्ट का मौका देने की मांग की। लेकिन यह कहते हुए मौका देने से इंकार कर दिया गया कि कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। कोर्ट के फैसले का हवाला दिया गया और कहा गया कि टाइम लाइन बगैर भर्ती प्रक्रिया अर्थहीन है। कोर्ट ने कहा कि नौ महीने बच्चे को अपने गर्भ में धारण करने वाली मां का उच्च स्थान है। उसे पुरस्कार मिलना चाहिए। बच्चे के जन्म के बाद उसे टेस्ट में बैठने का मौका नहीं दिया गया। उसने न्याय के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाने में देरी नहीं की। अनुच्छेद 226 में कोर्ट को शक्ति है कि किसी के साथ अन्याय न होने पाए। हस्तक्षेप के लिए पर्याप्त आधार है। न्याय दिलाने के लिए आदेश दिया जाना जरूरी है। ब्यूरो