याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ओझा ने तर्क दिया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय पीएचडी में प्रवेश से पहले प्री पीएचडी प्रवेश लेता है। उसमें सफल अभ्यर्थी भी पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश पा सकते हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश के मामले में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से जवाब तलब किया है। मामले में 22 मार्च को सुनवाई होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने विजया जायसवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है।
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याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ओझा ने तर्क दिया कि गोरखपुर विश्वविद्यालय पीएचडी में प्रवेश से पहले प्री पीएचडी प्रवेश लेता है। उसमें सफल अभ्यर्थी भी पीएचडी पाठ्यक्रम में प्रवेश पा सकते हैं।
विवि के नियम के मुताबिक पीएचडी में प्रवेश के लिए परास्नातक अंतिम सत्र के छात्र शामिल हो सकते हैं। लेकिन, अभ्यर्थी के मामले में विश्वविद्यालय ने उसका प्रवेश यह करते हुए रद्द कर दिया कि वह परास्नातक पास नहीं है। जबकि, याची प्री पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया में सफल है। इसके बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन ने उसका प्रवेश रद्द कर दिया। कोर्ट ने पीएचडी प्रवेश 2019-20 का परिणाम घोषित करने का आदेश देते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।