इस कॉलेज में 22 वर्षों से प्रधानाचार्य का पद न भरे जाने और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई संबंधी झूठा हलफनामा दाखिल करने पर अदालत ने अपनी नाराजगी दर्ज कराई। कहा, सरकार की ओर से इसे पूरा करने के लिए दिए गए उपक्रम के बावजूद माध्यमिक शिक्षा चयन बोर्ड में कोई सदस्य उपलब्ध नहीं है। ताकि, साक्षात्कार कराया जा सके।
याची के अधिवक्ता ने कहा कि इस बारे में स्कूल प्रशासन की ओर से कई बार माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड और माध्यमिक शिक्षा सचिव उत्तर प्रदेश को सूचित किया गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। इससे पहले कोर्ट में अपर मुख्य सचिव माध्यमिक शिक्षा आराधना शुक्ला की ओर से हलफनामा दाखिल कर बताया गया कि याची के स्कूल में प्रधानाचार्य के पद को भरे जाने के लिए कार्रवाई की जा रही है।
इसके बावजूद उक्त पद अब तक खाली है। कोर्ट ने इससे पहले भी कहा था कि शिक्षा समाज की बुनियादी जरूरतों से जुड़ा हुआ मुद्दा है। उसे ऐसे ही नहीं छोड़ा जा सकता है। इससे छात्र प्रभावित होंगे और भारी क्षति होगी। लिहाजा शिक्षा व्यवस्था को सुव्यवस्थित और विश्वसनीय बनाए जाने की जरूरत है, जिससे समाज लाभान्वित हो सके। लेकिन, अब तक स्थिति जस की तस है।