निर्धारित प्रक्रिया का नहीं किया गया पालन
इसके बाद अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के आधार पर तीन फरवरी 2015 को याची की बहाली का अनुरोध खारिज कर दिया। याची ने इस आदेश को वर्तमान याचिका में चुनौती दी थी। याची अधिवक्ता विनय शर्मा ने दलील दी कि याची के खिलाफ जब तक सही अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू नहीं की जाती तब तक उसकी सेवा समाप्त नहीं हो सकती।
हाईकोर्ट ने पाया कि प्रारंभिक जांच में भी याची को सुनवाई का अवसर नहीं दिया गया और नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं की गई। कोर्ट ने पीएसी की 43वीं वाहिनी, एटा के कमांडेंट को याची को तत्काल बहाल करने तथा सेवा की निरंतरता और बकाया वेतन सहित सभी परिणामी लाभ आठ सप्ताह के भीतर देने का निर्देश दिया। हालांकि, कोर्ट ने राज्य सरकार को उत्तर प्रदेश पुलिस अधिकारी अधीनस्थ श्रेणी (दंड एवं अपील) नियमावली, 1991 के नियम 14(1) के तहत नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू करने की छूट भी दी है।