कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने वाराणसी शहर के दाल मंडी क्षेत्र में सड़क को चौड़ा करने के लिए 30 जुलाई 2025 को आदेश जारी किया था। इसमें जमीन को स्वामियों की सहमति से खरीदने का प्रावधान था। शहनवाज खान घर के मालिक थे, उन्होंने राज्यपाल के पक्ष में बिक्री पत्र निष्पादित किया और कब्जा सौंप दिया।
परिसर खाली होने पर अधिकारियों ने इसे ध्वस्त कर दिया। याची ने बिक्री पत्र को चुनौती दी है, लेकिन याची यह नहीं बता सका कि उसने अंतरिम आदेश का पालन किया था या नहीं और क्या उसे इसके उल्लंघन के कारण बेदखल किया गया था। कोर्ट ने कहा कि ध्वस्तीकरण कब हुआ, यह तथ्यात्मक प्रश्न है, जिसका निर्धारण उचित प्रक्रिया में किया जाना चाहिए, न कि रिट क्षेत्राधिकार में। यदि संरचना ही ध्वस्त हो गई है तो किरायेदार को दी गई अंतरिम सुरक्षा का कोई महत्व नहीं है।