हालांकि यह पावर 7 साल व उससे कम दंडनीय अपराधों में इस्तेमाल किया जाएगा, लेकिन हमारा मानना है कि एक बार थाने पर जांच के नाम पर तहरीर होल्ड रखने का कल्चर बन जाने पर पिछड़ी,गरीब और निरक्षर जनता में पुलिस व कानून व्यवस्था के प्रति एक नकारात्मक धारणा बनेगी। यह सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य के मामले में दिए गए मैंडेट के एकदम उल्टा है।
इसी तरह के अन्य प्रावधान भी जनविरोधी, गलतफहमी बढ़ाने वाले, क्रूर व पुलिस राज को बढ़ाने की दिशा में जाते हैं जिनका सेक्शन वाइज डिटेल चर्चा अपने ज्ञापन में करेंगे। इस मौके पर अधिवक्ता विनय प्रताप सिंह, राजकिशोर यादव, धर्मेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह यादव, आशुतोष तिवारी, राजीव कुमार, कमलेश रतन यादव, यूनियन के अध्यक्ष अरविंद कुमार राय, यशवंत सिंह राधेश्याम द्विवेदी, जितेन्द्र कुमार सिंह उर्फ जीतू यादव, अनुभव द्विवेदी,,मानस, चिरविजय आदि बड़ी संख्या में अधिवक्ता गण उपस्थित रहे।