नशे के रूप में किया जाता है कोडिन का इस्तेमाल
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि ये दवाएं लाइसेंस के तहत बेची जा रही हैं और कोडीन की मात्रा कम होने के कारण यह एनडीपीएस एक्ट के दायरे में नहीं आता। वहीं अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी व अधिवक्ता परितोष मालवीय ने दलील दी कि पकड़ी गई दवा में कोडीन का इस्तेमाल किया गया है। ऐसे में कोडीन का दवा के बजाए नशे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है तो एनडीपीएस एक्ट के तहत भी कार्रवाई की जा सकती है।
कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद माना कि ''ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट'' बाजार में मानक बनाए रखने के लिए है, जबकि ''एनडीपीएस एक्ट'' नशे के अवैध कारोबार को रोकने के लिए बनाया गया कानून है। ऐसे में दोनों कानून एक साथ लागू हो सकते हैं। हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए पुलिस को सावधानीपूर्वक और बिना किसी दुर्भावना के जांच जारी रखने का निर्देश दिया है। लाइसेंस की आड़ में नशीली दवाओं की कालाबाजारी में शामिल हैं। अब उन्हें एनडीपीएस एक्ट की कठोर धाराओं और लंबी जेल की सजा का सामना करना पड़ सकता है।