इलाहाबाद हाईकोर्ट ने विधवा से दुराचार के आरोपी की जमानत मंजूर कर ली है और कहा है कि नि:संदेह पीड़िता 35 साल की विधवा है और वह विवाह से पहले अज्ञात व्यक्ति से संबंध स्थापित करने के दुष्प्रभाव को भली भांति जानती है। आरोपी के खिलाफ दुराचार के आरोप को साबित करने के लिए मेडिकल जांच जरूरी है, फिर भी उसने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया।
आरोपी ने शादी का वायदा कर भरोसा जीता। दो साल तक प्रेमजाल में फंसा उपभोग कर वायदे से मुकर गया और धमका रहा है। किंतु पीड़िता ने मेडिकल जांच कराने से इनकार कर दिया है। ऐसे में याची जमानत पाने का हकदार है। यह आदेश न्यायमूर्ति राहुल चतुर्वेदी ने कानपुर नगर के दुर्गेश त्रिपाठी की अर्जी को मंजूर करते हुए दिया है।
याची का कहना था कि पीड़िता के पति की 19 दिसंबर 2016 को मौत हो गई थी। इसके बाद याची से नजदीकी बढ़ी और प्रेम संबंध बन गए। दोनों ने दो साल तक संबंध बनाए रखे। पीड़िता ने कोई ऐतराज नहीं किया। चार दिसंबर 2020 को दुराचार का आरोप लगा एफआईआर दर्ज कराई है और मेडिकल जांच से इनकार कर रही है, जिससे संबंधों का खुलासा हो सकता है।