हाईकोर्ट को यह तय करना है कि वाराणसी की अदालत इस मुकदमे को सुन सकती है या नहीं। हाईकोर्ट में गत 28 अगस्त को इस मामले में करीब एक घंटे तक चली सुनवाई में मुस्लिम पक्ष ने तीन बार निर्णय सुरक्षित होने के बाद फिर सुनवाई किए जाने के पर आपत्ति जताई थी।साथ ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के पुराने फैसले के आधार पर दोबारा सुनवाई नहीं किए जाने की दलील दी थी। हिंदू पक्ष की ओर से भी कहा गया था कि फैसला जल्दी आना चाहिए। हालांकि, हिंदू पक्ष ने दोबारा सुनवाई किए जाने का विरोध नहीं किया था।
इससे पूर्व इन पांचों याचिकाओं पर सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति प्रकाश पडिया ने 25 जुलाई को निर्णय सुरक्षित कर लिया था। उन्होंने 28 अगस्त को इस मामले में फैसला सुनाने की तारीख भी तय की थी। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश ने अपनी शक्ति का प्रयोग करते हुए केस मंगा लिया। इसके बाद इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की कोर्ट में हुई। अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।
विश्वेश्वर-ज्ञानवापी केस की सुनवाई 18 को
वाराणसी के विश्वेश्वर-ज्ञानवापी मामले में मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई वकीलों के कार्य बहिष्कार की वजह से नहीं हो सकी। मुख्य न्यायाधीश की कोर्ट में मंगलवार को इस मामले की सुनवाई होनी थी। कोर्ट अब इस केस की सुनवाई 18 सितंबर को करेगी। वाराणसी कोर्ट में दायर सिविल वाद की पोषणीयता को लेकर सुनवाई होगी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पाडिया की कोर्ट में हुई थी। कोर्ट ने मामले में फैसला सुरक्षित कर लिया था। इसके बाद केस को चीफ जस्टिस की कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया था।