पानी में क्लोरिन की जांच करती टीम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
जलकल विभाग की पाइप लाइन से आपके घरों में आने वाला पानी आपकी सेहत के लिए घातक हो सकता है। यह खुलासा लखनऊ से इलाहाबाद आई प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की टीम ने किया है। खुसरोबाग स्थित प्लांट में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। पानी में तय मानक से दोगुना क्लोरीन मिलाई जा रही है। ऐसे में जलकल विभाग का पानी कैंसर समेत कई बीमारियों का कारण बन सकता है।
दूषित जलापूर्ति को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल है। हाईकोर्ट के आदेश पर ही मंगलवार को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड इलाहाबाद में सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डॉ.एके सिंह, लखनऊ केंद्रीय लैब की सहायक वैज्ञानिक अधिकारी डॉ.नीलिमा दीपक, वैज्ञानिक सहायक डॉ.ज्योति तिवारी एवं मनीष त्रिपाठी की टीम अचानक खुसरोबाग पंपिंग स्टेशन पहुंची। जलकल विभाग के एक्सईएन एके स्वामी, जेई राजेश श्रीवास्तव, तकनीकी कर्मियों की मौजूदगी में टीम ने यमुना से प्लांट में आ रहे रॉ वॉटर, फिल्टर्ड वाटर और क्लोरीन मिलाने के बाद सप्लाई किए जाने वाले पानी का नमूना लिया। यहां फिल्टरेशन के बाद पानी में क्लोरीन मिलाने की प्रक्रिया पर सदस्यों ने आपत्ति जताई।
खुसरोबाग के बाद सदस्यों ने देर शाम जीरो रोड, रामभवन चौराहा, आर्यकन्या चौराहा, बांसमंडी, अतरसुइया, मुट्टीगंज माया प्रेस के पास, करेली आदि में नालों से पानी का नमूना लिया। टीम बुधवार को भी अलग-अलग हिस्सों से नमूने लेगी। डॉ.दीपक के मुताबिक नमूनों की जांच कर रिपोर्ट हाईकोर्ट में प्रस्तुत की जाएगी।
प्लांट में दो स्थानों पर सिलेंडर लगाकर पानी में क्लोरीन मिलाई जा रही है। एक स्थान पर पानी की जांच में क्लोरीन की मात्रा दो मिलीग्राम प्रति लीटर और दूसरे स्थान पर एक मिलीग्राम प्रतिलीटर दर्ज की गई जबकि पानी में क्लोरीन की मात्रा प्रतिलीटर एक मिलीग्राम से कम होनी चाहिए।
0 डॉ.एके सिंह, सहायक वैज्ञानिक अधिकारी