यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति मो.अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने दोषी जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और मलानी उर्फ इजरायल की ओर से फांसी की सजा के खिलाफ दाखिल अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह ‘दुर्लभतम’ मामला नहीं है, जहां मौत की सजा दी जा सकती हो।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बुलंदशहर में छात्रा से कार में सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या करने के तीन दोषियों को मिली फांसी की सजा 25 साल की निश्चित अवधि के आजीवन कारावास में तब्दील कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति मो.अजहर हुसैन इदरीसी की खंडपीठ ने दोषी जुल्फिकार अब्बासी, दिलशाद अब्बासी और मलानी उर्फ इजरायल की ओर से फांसी की सजा के खिलाफ दाखिल अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह ‘दुर्लभतम’ मामला नहीं है, जहां मौत की सजा दी जा सकती हो। समाज में दोषियों के सुधार और पुनर्वास की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है।
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मामला नगर कोतवाली क्षेत्र का है। चांदपुर में रहने वाली छात्रा दो जनवरी 2018 को साइकिल से घर की ओर जा रही थी। रास्ते में कार से आए तीन युवकों ने उसे खींचकर गाड़ी में बैठा लिया था। चलती कार में उससे दुष्कर्म किया गया। इसके बाद उसकी हत्या कर दी गई। दो दिन बाद चार जनवरी को छात्रा का शव ग्रेटर नोएडा के दादरी में अकबरपुर-भोगपुर गांव के बीच रजवाहे में मिला था। पुलिस की जांच के बाद शव की शिनाख्त हुई और छात्रा के परिवार ने तीनों युवकों के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी।
ट्रायल कोर्ट ने सख्त टिप्पणी संग सुनाई थी फांसी
बुलंदशहर के ट्रायल कोर्ट ने मार्च 2021 में तीनों दोषियों को फांसी की सजा सुनाते हुए सख्त टिप्पणी भी की थी। कहा था कि इस घटना से डरकर माता-पिता अपनी लड़कियों को स्कूल भेजने से डर रहे हैं। यह सामान्य घटना नहीं है। अगर पढ़ाई के लिए घर से बाहर निकलने वाली बेटियों की हिफाजत नहीं की गई तो सरकार के चलाए जा रहे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान के कोई मायने नहीं रह जाएंगे।