ओलावृष्टि से बर्बाद हुए किसानों की फसल को सरकार की ओर से आज भी कोई राहत नहीं मिल सकी है। राष्ट्रीय किसान मजदूर संगठन ने यह मामला हाईकोर्ट के समक्ष एक बार फिर उठाया है। किसानों को किसान क्रेडिट कार्ड पर लिए गए कर्ज पर मिलने वाले मुआवजे को लेकर संगठन ने कोर्ट में पूर्व के आदेश में संशोधन की अर्जी पेश की है।
संगठन के संयोजक वीएम सिंह ने बताया कि उन्होंने ओलावृष्टि से हुए फसल नुकसान के मद्देनजर एक जनहित याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी। याचिका में कहा गया है जिन किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड पर कर्ज लिया था वह फसल बर्बाद होने के कारण कर्ज और ब्याज की रकम चुकता नहीं कर सकते हैं। नियमानुसार किसान द्वारा लिए गए कर्ज की राशि बीमित होती है। लिहाज नुकसान की भरपाई बीमा राशि से की जाए। बैंकों का इसके जवाब में कहना था कि ज्यादातर किसानों ने बीमे का प्रीमियम जमा नहीं किया है इसलिए उनको इसका लाभ नहीं मिल सकेगा। संगठन की ओर से बहस की गई कि प्रीमियम जमा करने का उत्तरदायित्व बैंकों का है। यदि बैंकों ने ऐसा नहीं किया है तब भी माना जाएगा कि किसानों का प्रीमियम जमा है।
हाईकोर्ट ने छह अक्तूबर 2015 को केंद्र सरकार, राज्य सरकार, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया सहित सभी बैंकों और उत्तरदायी संस्थाओं को आदेश दिया था कि किसान फसल बीमा योजना को प्रभावी तरीके से लागू किया जाए ताकि इसका लाभ किसानों को मिल सके। कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी टिप्पणी की है कि किसानों को फसल बीमा योजना का लाभ पहुंचा पाने में सरकार सहित वित्तीय एजेंसियां नाकाम रहीं। बैंकों ने प्रीमियम नहीं काटे और यदि काटे भी तो संबंधित बीमा कंपनी तक पहुंचाया नहीं।
वीएम सिंह ने अर्जी में इस आदेश का पालन नहीं होने की शिकायत की है। न्यायमूर्ति अरुण टंडन की अध्यक्षता वाली पीठ ने राज्य स्तरीय बैंकर्स कमेटी से पूछा है कि उसने बीमा राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए हैं। कोर्ट ने याची को इस मामले में अवमानना याचिका भी दाखिल करने की छूट दी है।
वर्ष 2014-15 में असमय हुई बारिश और ओलावृष्टि से रबी की फसल पूरी तरह से बर्बाद हो गई थी। प्रदेश के 73 जिलों में करीब 84.19 लाख हेक्टेयर भूमि इससे प्रभावित हुई। लगभग 7543.14 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया गया। याची की ओर से कहा गया कि सरकार व्यापारिक समूहों का करोड़ों रुपये का कर्ज माफ कर सकती तो किसानों का भी कर्ज इस मामले में माफ किया जाना चाहिए।