मुस्लिम पक्ष ने केस टालने की मांग की
ऐन मौके पर स्थानांतरित हुई मामले की सुनवाई पर अंजुमन इंतजामिया मसाजिद समेत अन्य मुस्लिम पक्षकारों ने आपत्ति उठाई थी। मुस्लिम पक्ष ने दलील दी थी कि पिछले कई वर्षों में करीब 75 तारीखों पर मामले की सुनवाई हो चुकी है और तीन बार निर्णय सुरक्षित हो चुका है। न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत द्वारा निर्णय सुनाए जाने की तिथि पर अचानक सुनवाई को अग्रिम सुनवाई के लिए मुख्य न्यायमूर्ति की अदालत में सूचीबद्ध किया जाना अवैधानिक है।
मुस्लिम पक्ष ने उस शिकायती पत्र की प्रति उपलब्ध कराने की मांग भी की थी, जिसके आधार पर मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की अदालत से स्थानांतरित कर मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर खुद कर रहे हैं। हालांकि, अदालत ने मुस्लिम पक्ष की इस दलील को पहले ही खारिज कर दिया है और मामले में सुनवाई करने का फैसला लिया है।
बुधवार को मामले की सुनवाई नियत थी, लेकिन मुस्लिम पक्षकारों की तरफ से मामले से जुड़े कई दस्तावेजों के निरीक्षण का हवाला देते हुए सुनवाई को टालने की मांग की गई। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अक्तूबर को करने का फैसला लिया है।