सुनवाई के दौरान बुधवार को केवल मंदिर पक्ष की ओर से अधिवक्ता विजय शंकर रस्तोगी ने अपने तर्क रखे। उन्होंने कहा कि पुराने अभिलेखों को देखने पर यह साफ है कि मंदिर तो अनादिकाल से है ही, उसके चारों तरफ बनाई गई बाउंड्री भी हजारों साल पुरानी है। अधिवक्ता विजय शंकर ने कहां कि पूर्व साम्राज्य में जो गलतियां की गई हैं, जबरजस्ती विश्वनाथ मंदिर को तोड़ा गया है, उसे वर्तमान सरकार अगर पहचान लेती है तो अदालतें उन गलतियों के संबंध में संज्ञान लेकर उपचार दें सकती हैं। कहा कि इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी अपनी पूर्ण पीठ के आदेशों में यह कहा है कि अगर पूर्व साम्राज्य के समय में हुईं गलतियों को वर्तमान सरकार समझती है और उसे मान लेती है तो उसे सुधारा जा सकता है।
राम जन्मभूमि विवाद मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने ऐसा ही सुझाव दिया था और इस मामले में भी ऐसा ही हो सकता है। कहा गया कि 1936 में दीन मोहम्मद के केस में अंग्रेजों ने जो लिखित बयान दिया था, उसमें हिंदुओं के अधिकारों को माना था और विश्वनाथ मंदिर को मंदिर एक्ट की श्रेणी में रखा गया है।