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इलाहाबाद विवि में अतिथि प्रवक्ताओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार

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अतिथि प्रवक्ताओं ने किया कक्षाओं का बहिष्कार
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प्रयागराज। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शुक्रवार को अतिथि प्रवक्ताओं ने कक्षाओं का बहिष्कार किया और छात्रों के साथ मिलकर परिसर में शांति मार्च निकाला। उनकी मांग थी कि शिक्षक भर्ती के इंटरव्यू में एक पद के मुकाबले कम से कम 20 अभ्यर्थियों को बुलाया जाए। उनका कहना था कि चयन प्रक्रिया की जो व्यवस्था अपनाई गई है, उस हिसाब से कई अतिथि प्रवक्ता इंटरव्यू से पहले ही छंट जाएंगे। इस बाबत उन्होंने कुलपति से राहत देने की मांग की।
विश्वविद्यालय के चारों संकायों के अतिथि प्रवक्ताओं ने तकरीबन तीन सौ छात्रों एवं छात्र नेताओं के साथ शांति मार्च निकाला। एबीवीपी के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य अतेंद्र सिंह ने कहा कि शिक्षक भर्ती के साक्षात्कार में एक पद के सापेक्ष कम से कम 20 छात्रों को बुलाया जाना चाहिए। समाजवादी छात्रसभा के अजय यादव सम्राट ने कहा कोरोना काल में अपनी जान पर खेलकर हर दिन विभाग आकर ऑनलाइन कक्षा लेने वाले अतिथि प्रवक्ताओं एवं शोध छात्रों ने पूरे कोरोना काल में निर्बाध रूप से कक्षाओं का संचालन किया। इंटरव्यू में उनके बुलावे के लिए हम अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
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प्राचीन इतिहास विभाग के शिवांश तिवारी ने कहा कि अतिथि प्रवक्ता उस दीपक की तरह है जिन्होंने पिछले दशक भर से छात्रों में ज्ञान का प्रकाश भरा और अपनी युवावस्था इस आस में विश्वविद्यालय के लिए गुजार दी कि उन्हें अपनी मातृसंस्था में पढ़ाने का अवसर मिलेगा, लेकिन स्थिति यह है कि उनके अध्यापन की गणना भी अनुभव के रूप में नहीं हो रही है। सड़क से संसद तक हम अतिथि प्रवक्ता, नेट और शोध छात्रों की लड़ाई लड़ेंगे। एनएसयूआई के पूर्व इकाई अध्यक्ष अभिषेक द्विवेदी ने कहा कि इंटरव्यू में केवल आठ गुना अभ्यर्थियों को बुलाया जाना गांव और गरीब पृष्ठभूमि से आने वाले अभ्यर्थियों को एक ऐसे अपराध की सजा देने जैसा है जो उन्होंने किया ही नहीं।
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