2019 महाकुंभ के लिए इस बार जीआरपी की ओर से भी तैयारी शुरू कर दी गई है। दुनिया भर में प्रसिद्ध इस धार्मिक आयोजन के लिए जीआरपी की ओर से आठ करोड़ का बजट सरकार से मांगा गया गया है। साथ ही 5000 जवानों की भी मांग की गई है। शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में एडीजी रेलवे वीके मौर्य ने यह जानकारी दी।
एडीजी ने बताया कि जीआरपी के लिए यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है। यही वजह है कि अपराधों की रोकथाम के लिए व्यापक प्रयास किए जा रहे हैं। ट्रेनों, स्टेशनों पर ऐसी घटनाएं न हों, इसके लिए जीआरपी की ओर से ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों का सत्यापन कराने का निर्णय लिया गया है। जल्द ही इसकी शुरुआत की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि अवैध वेंडर एक बड़ी समस्या हैं। ऐसे में डीजी की ओर से सीआरबी को एक चिट्ठी भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि पर्याप्त मात्रा में लाइसेंस जारी न होने की वजह से ही अवैध वेंडरों की समस्या है। चूंकि मांग की अपेक्षा में वैध वेंडरों की संख्या कम है, यही वजह है कि अवैध वेंडर यात्रियों से मनमानी करने में कामयाब होते हैं। निवेदन किया गया है कि पर्याप्त मात्रा में लाइसेंस जारी किए जाएं। इससे पहले एडीजी ने सराहनीय कार्य करने वाले जीआरपीकर्मियों को सम्मानित किया गया। इस दौरान आईजी बीके मीना, एसपी जीआरपी, तीनों सीओ व सभी एसएचओ मौजूद रहे।
एडीजी रेलवे ने बताया कि ट्रेनों में होने वाले अपराधों पर लगाम लगाने के लिए जवानों को कम्युनिटी पुलिसिंग का सहारा लेने को कहा गया है। निर्देशित किया गया है कि पुलिसकर्मी यात्रियों से संवाद बनाए रखें। जरूरत पड़े तो उन्हें अपना कॉन्टैक्ट नंबर भी दें। इससे यात्रियों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी, साथ ही पुलिसकर्मियों को भी जल्द से जल्द घटना की जानकारी मिल सकेगी।
स्टेशन के आसपास रहने वाले असहायों, जरूरतमंदों को जीने की नई राह सिखाने के लिए भी जीआरपी प्रयासरत है। एडीजी रेलवे ने बताया कि इस संबंध में उनकी नेचुरल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन के निदेशक से बात हुई है। उनसे अनुरोध किया गया है कि उपरोक्त लोगों को कौशल विकास के गुर सिखाकर उन्हें जीने की नई राह सिखाई जाए। बताया कि कई बार वह गलत संगत के चलते गैरकानूनी कार्यों में लिप्त हो जाते हैं। ऐसे में वह भटकें न, इस पूरी कवायद का यही मूल उद्देश्य है।