शहर के कई बिल्डर एवं कंस्ट्रक्शन कंपनियों ने ग्रुप हाउसिंग एवं प्लाटिंग के लिए जमीन का लेआउट प्लान स्वीकृत कराया, लेकिन इसके एवज में निर्धारित रकम एडीए में नहीं जमा कर रहे हैं। जलालपुर, अरैल, झूंसी, कादिलपुर, पीपलगांव, सुलेम सराय आदि में लेआउट प्लान और ग्रुप हाउसिंग स्वीकृत कराने वालों पर एडीए का 17.78 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इसे लेकर एडीए उपाध्यक्ष (वीसी) सख्त हो गए हैं। उनके आदेश पर ऐसे बकाएदारों को नोटिस जारी किया जा रहा है। पिछले दिनों दो बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई हुई तो एक ने तत्काल रकम जमा की जबकि दूसरे ने रकम जमा करने के लिए सप्ताहभर का समय मांगा है।
एडीए ने स्वीकृत लेआउट प्लान और ग्रुप हाउसिंग के मानचित्रों पर देय धनराशि को किश्तों में अदा करने की सुविधा प्रदान की है, लेकिन एडीए की इस सुविधा का दुरुपयोग कर रही हैं। वीसी देवेंद्र कुमार पांडेय ने पिछले दिनों इसकी जांच कराई तो कई प्रकरण ऐसे मिले, जिनमें किश्तें अदा करने की समय सीमा भी खत्म हो गई है। जांच में पता चला कि अरैल में एके बंसल, वंदना बंसल ने ग्रुप हाउसिंग का मानचित्र स्वीकृत कराया, लेकिन बकाया एक करोड़ 28 लाख 65 हजार 754 रुपये अब तक नहीं जमा किए, जबकि यह रकम 30 अप्रैल तक ही जमा कर दी जानी थी। इसी तरह न्यू विल्डबेल प्राइवेट लिमिटेड के भरेठा स्थित ग्रुप हाउसिंग के स्वीकृत मानचित्र पर तीन करोड़ 16 लाख 32 हजार 401 रुपये बकाया है।
इसके साथ जलालपुर घोषी में मयंक जायसवाल के स्वीकृत लेआउट प्लान पर 72 लाख 71 हजार 525 रुपये, गोल्डन सहकारी आवास समिति के झूंसी में स्वीकृत लेआउट प्लान पर 91 लाख 53 हजार 990 रुपये, यहीं अजय सिंह एवं अन्य ने लेआउट प्लान के एवज में 91 लाख 10 हजार 227 रुपये, जलालपुर में मंयक जायसवाल द्वारा स्वीकृत लेआउट प्लान पर दो करोड़ 88 लाख 57 हजार 152 रुपये, पीपल गांव में सैनिक वेलफेयर के लेआउट प्लान पर दो करोड़ पांच लाख 73 हजार 777 रुपये और सुलेम सराय में शेरवानी इंडस्ट्रीज के लेआउट प्लान पर पांच करोड़ 49 लाख 62 हजार 544 रुपये बकाया है। उपाध्यक्ष ने समय से किश्त जमा करने और जिन मामलों में समयावधि खत्म हो चुकी है, उनके निर्माण कार्यों को तत्काल बंद कराने का फरमान जारी किया, ताकि बकाया धनराशि जमा हो सके। इसके बाद एक लेआउट प्लान पर रकम जमा हो गई जबकि एके बंसल ने बकाया रकम जमा करने के लिए सप्ताहभर का समय मांगा था। उपाध्यक्ष का कहना है कि बकाएदारों से वसूली के लिए सख्ती की जा रही है।