पिछले दिनों भटककर आए बादलों से हुई रिमझिम और आंधी-तूफान के चलते कुछ दिन गर्मी से थोड़ी निजात जरूर मिली थी, लेकिन सूरज ने फिर आंखें तरेर दी हैं। शनिवार को सूरज ऐसा दहका कि पारा एक बार फिर 42 के पार पहुंच गया। हवा न चलने के कारण धूप और उमस के गठजोड़ ने ऐसा कहर ढाया कि लोग परेशान हो गए। बाहर निकलने पर धूप शरीर को जलाने पर आमादा थी तो घर के अंदर कूलर-पंखे में उमस से निजात नहीं दिला पा रहे थे।
एसी कुछ राहत दे रहा था लेकिन बिजली की लुकाछिपी ने तंग कर दिया। हर जगह लोग पसीने से तर-बतर थे। सड़कों पर दोपहर के समय कम लोग निकले, जिन्हें काम पर जाना था वे सिर पर गम्छा या तौलिया लपेटे रहे। कई सड़कों पर सन्नाटा रहा। बाजारों में भी भरी दोपहरी ग्राहकी कम रही। मौसम विज्ञानियों के अनुसार मौसम का यह मिजाज अच्छे मानसून के संकेत हैं। संभावना है कि एक-दो दिन में गरज-चमक के साथ हल्की बारिश भी हो।
दिन के पारे ने मई महीने में 47 का आंकड़ा छूकर नया रिकार्ड बनाया था। अब रात के पारे ने भी 35 का आंकड़ा छूकर नए रिकार्ड पर पहुंच गया है। दिन और रात के पारे में अंतर कम होने और वातावरण में लगातार नमी बढ़ने से लोग गर्मी के साथ उमस से परेशान हो हुए। उनका घर से बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है।
शनिवार को दिन का तापमान 42.2 फीसदी रिकार्ड किया गया। यह शुक्रवार के 40.8 डिग्री से 1.4 डिग्री अधिक है। रात के पारे में शनिवार के मुकाबले 3.4 डिग्री का उछाल आया। रात का पारा शनिवार को 3.8 डिग्री रिकार्ड किया गया। पारे की तरह नमी भी 65 के ऊपर रही। हालांकि दिन में तेज धूप होने से नमी में कमी आई है। दिन में नमी 31 फीसदी रही। मौसम में हो रहे उठापटक का असर लोगों की सेहत पर पड़ रहा है। गर्मी से परेशान लोग उमस से बेहाल हो गए। वे एसी, पंखे का सहारा ढूंढते रहे। शाम को पूरब की हवाओं ने भी असर दिखाया तो आसमान में रह-रहकर बादल भी नजर आए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के मौसम विज्ञानी डॉ. सुनीत द्विवेदी ने कहा कि मौसम का हाल अब ऐसे ही बना रहेगा। 20 जून तक मानसून आ जाएगा।