मौनी अमावस्या का स्नान पर्व 20 जनवरी को है। प्रशासन का अनुमान है कि उस दिन तकरीबन 80 लाख या उससे भी अधिक स्नानार्थी माघ मेला क्षेत्र में पहुंच सकते हैं, सो हर साल मेले में प्रशासन की वीआईपी से अपील रहती है कि मौनी अमावस्या या अन्य स्नान पर्वों पर शहर न आएं, क्योंकि उस दिन प्रशासन और पुलिस के लोग स्नान पर्व के आयोजन में फंसे रहते और ऐसे में वीआईपी को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया करा पाना मुश्किल हो जाता है लेकिन अब प्रशासन सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। मौनी अमावस्या के दिन यूपी के राज्यपाल राम नाईक इलाहाबाद आ रहे हैं। ऐसे में राज्यपाल की सुरक्षा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।
राज्यपाल राम नाईक 20 जनवरी को इलाहाबाद विश्वविद्यालय में ‘थ्योरी ऑफ इंग्लिश ऐंड टीचिंग’ विषय पर आयोजित राष्ट्रीय सेमिनार में शामिल होने आ रहे हैं। राज्यपाल ने जब आने के लिए अपनी सहमति दी तो प्रशासनिक अफसरों के सामने उनकी सुरक्षा को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई। 20 जनवरी को मौनी अमावस्या का स्नान पर्व है और मेले में सबसे ज्यादा भीड़ भी इसी दिन होती है। सभी ट्रेनें एवं बसें फुल हो जाती हैं और मेला क्षेत्र के आसपास के मुहल्लों में पैदल चलना भी दुश्वार हो जाता है। शहर के ज्यादातर हिस्से में ट्रैफिक डायवर्ट रहेगा। प्रशासन और पुलिस का पूरा जोर मेला क्षेत्र और उसके आसपास के इलाकों पर होगा। बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर भी भीड़ को संभालने के लिए बड़ी संख्या में फोर्स की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में राज्यपाल की सुरक्षा की अतिरिक्त जिम्मेदारी किसी चुनौती से कम नहीं होगी। प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक अफसरों ने विश्वविद्यालय प्रशासन से आग्रह किया था कि कार्यक्रम की तिथि आगे बढ़ा दी जाए लेकिन बात नहीं बनी। सूत्रों के मुताबिक जिस हेलीकॉप्टर से राज्यपाल आएंगे, उसे विश्वविद्यालय मैदान पर उतरवाया जा सकता है, ताकि सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम के लिए ज्यादा कवायद न करनी पड़े और सिर्फ आयोजन स्थल पर सुरक्षा की व्यवस्था करने से काम चल जाए।