राज्यपाल ने कहा, तेजी से आगे बढ़ रहीं बेटियां, दस साल बाद बढ़ाना पड़ेगा आरक्षण। राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में मेडल पाने वालों में 58 फीसदी छात्राएं।
प्रो. राजेंद्र प्रसाद रज्जू भाइया राज्य विवि के दीक्षांत समारोह में गौरी श्रीवास्तव को रामलुभाई गुलाटी दानदाता स्वर्ण पदक प्रदान करती राज्यपाल आनंदी बेन पटेल
- फोटो : prayagraj
राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने 50 फीसदी महिला आरक्षण की वकालत की है। मंगलवार को प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भइया) राज्य विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में उन्होंने मेडल पाने वाली छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि राजनीति में तो 33 फीसदी महिला आरक्षण है, लेकिन जिस तरह हर क्षेत्र में बेटियां आगे बढ़ रहीं हैं, आने वाले 10 वर्षों में उनके लिए 50 फीसदी से अधिक आरक्षण करना ही पड़ेगा।
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बतौर कुलाधिपति राज्यपाल ने 132 मेधावियों को मेडल वितरित किए। समारोह में कुल 14,500 छात्रों को परास्नातक की डिग्री दी गईं और 1,17,868 को स्नातक की डिग्री प्रदान की गईं। राज्यपाल ने कहा कि जिस तरह मेडल प्राप्त करने वालों में 58 फीसदी बेटियां हैं, वह बड़े बदलाव का संकेत है। उन्होंने सावित्रीबाई फुले को याद करते हुए बेटियों को पढ़ने के लिए प्रेरित किया। कहा कि सावित्रीबाई फुले देश की पहली महिला शिक्षक थीं, उस वक्त बेटियां स्कूल भी नहीं जातीं थी। समाज और देश बदल रहा है। बेटियां हर क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहीं हैं।
कुलपति बदलने के साथ न बदली जाएं नीतियां
राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में कुलपति बदलने के साथ नीतियां भी बदल जाती हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए। नीतियों पर काम होगा, तो विश्वविद्यालय को मजबूत आधार मिलेगा। इसी वजह से उन्होंने प्रदेश के 31 विश्वविद्यालयों एवं निजी शिक्षण संस्थानों से पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार करने को कहा है। राज्य विश्वविद्यालय ने 14 पॉलिसी डॉक्यूमेंट तैयार किए हैं। इसके लिए उन्होंने कुलपति प्रो. अखिलेश सिंह एवं उनकी टीम को बधाई दी और कहा कि इस तरह के डॉक्यूमेंट तैयार करने से नीतियों में बदलाव नहीं होगा और उन्हें मजबूती से लागू किया जा सकेगा।
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पहले यूपी में बनती थीं फर्जी डिग्रियां
राज्यपाल आंनदी बेन पटेल ने कहा कि जब वह गुजरात में शिक्षामंत्री थीं, तब उन्होंने 225 ऐसे शिक्षकों की डिग्री की जांच कराई थी, जिन्होंने यूपी से डिग्री प्राप्त की थीं। जांच के बाद केवल एक डिग्री सही मिली और बाकी सभी फर्जी थीं, लेकिन अब ऐसा नहीं होता है। सुधार तेजी से हुआ है। गलत काम लंबे समय तक नहीं टिकता है।