शहरों में सड़क किनारे और चौराहों पर राजनेताओं व व्यावसायिक संस्थाओं के होर्डिंग-बैनर मनमाने तरीके से लगाने पर हाईकोर्ट ने नाराजगी जताई है। सभी नगर निगमों को आदेश दिया है कि इन प्रचार सामग्रियों को युद्ध स्तर पर हटाया जाए। उन एजेंसियों पर भी कार्रवाई के लिए कहा है जिन्होंने इनको लगाया है। जिन संस्थाओं ने होर्डिंग लगाने के लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है, उनके लाइसेंस रद्द कर दिए जाएं। प्रदेश सरकार को निर्देश दिया है कि वह होर्डिंग लगाने की नीति तय करे। नगर आयुक्त इसका मसौदा सरकार को उपलब्ध कराएंगे तथा सरकार द्वारा तय नीति का कड़ाई से पालन करना होगा।
आलोक कुमार द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही मुख्य न्यायाधीश डॉ. डीवाई चंद्रचूड और न्यायमूर्ति सुनीत कुमार की खंडपीठ ने कहा कि यातायात में अवरोध पैदा करने वाली प्रचार सामग्री को लगाने की अनुमति किसी भी दशा में नहीं दी जा सकती है। इसी याचिका पर पूर्व में खंडपीठ गाजियाबाद, इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर और लखनऊ के नगर आयुक्तों को अवैध होर्डिंग हटाने का आदेश दे चुकी है। होर्डिंग लगाने के लिए गाइड लाइन तय करने के लिए भी कहा था। नगर आयुक्तों को इस पर अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपनी थी। मात्र गाजियाबाद के नगर आयुक्त ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की। खंडपीठ ने उनके द्वारा की गई कार्रवाई पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा जो फोटोग्राफ दिए गए हैं, उससे साफ है कि पूरे शहर में बेतरतीब होर्डिंग लगे हुए हैं। इनको देखने से पता चलता है कि किस प्रकार से राजनीतिक दल और व्यावसायिक संस्थान कानून का मखौल उड़ा रहे हैं।
सड़कों और चौराहों पर लगे अवैध होर्डिंग से मार्ग दुघर्टनाएं बढ़ रही हैं। इनकी वजह से यातायात की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई हैं। खंडपीठ ने सभी नगर आयुक्तों को कार्रवाई कर व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा है। होर्डिंग लगाने के लिए एक विशेष टीम गठित करने और की गई कार्रवाई का चार्ट बनाकर अदालत में पेश करने का निर्देश है। मामले में 19 मार्च को अगली सुनवाई होगी।