लिखित परीक्षा 28 फरवरी को ली गई थी।
यूपी बोर्ड की ओर से शुक्रवार को घोषित परिणाम में वित्तविहीन स्कूलों ने सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों को काफी पीछे छोड़ दिया है। प्रदेश और जिले की मेरिट में तो वित्तविहीन विद्यालयों के विद्यार्थियों का पूरी तरह से कब्जा है। वित्तविहीन विद्यालयों की तुलना में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों का हाईस्कूल का परिणाम काफी खराब रहा।
बोर्ड की ओर से जारी मेरिट लिस्ट में प्रथम पांच स्थानों पर वित्तविहीन विद्यालयों के विद्यार्थी ही हैं। हाईस्कूल के प्रथम पांच स्थान पर सभी विद्यार्थी शामिल हैं और ये सभी वित्तविहीन विद्यालयों के हैं। यही स्थिति इंटरमीडिएट में भी है। इंटरमीडिएट की प्रथम पांच की मेरिट में 13 विद्यार्थी शामिल हैं और इसमें भी राजकीय और सहायता प्राप्त इंटर कालेजों का हाथ खाली है। यूपी बोर्ड के सभापति अमरनाथ वर्मा ने स्वीकार किया कि मेरिट में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों का कोई भी विद्यार्थी शामिल नहीं है। इलाहाबाद में भी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की टॉप 10 की मेरिट में राजकीय इंटर कालेज और राजकीय बालिका इंटर कालेज का कोई विद्यार्थी शामिल नहीं है। सहायता प्राप्त शिव जियावन इंटर कॉलेज लेड़ियारी का हाईस्कूल का एक छात्र दसवीं रैंक पर है।
पूरे प्रदेश का परिणाम देखें तो हाईस्कूल में राजकीय इंटर कालेजों उत्तीर्ण प्रतिशत मात्र 72.51 फीसदी रहा। इन विद्यालयों में 116274 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें 85434 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए हैं। सहायता प्राप्त विद्यालयों में कुल 805412 विद्यार्थियों में से 616662 विद्यार्थी उत्तीर्ण हुए। इस तरह से उत्तीर्ण प्रतिशत 75.56 प्रतिशत रहा। इसके विपरीत वित्तविहीन विद्यालयों का परिणाम 82.82 प्रतिशत रहा। वित्तविहीन विद्यालयों में कुल 1936785 विद्यार्थी परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 1625513 विद्यार्थी सफल घोषित किए गए हैं।
गौर करने वाली बात यह भी है कि प्रदेश में कुल 1910 राजकीय विद्यालयों के विद्यार्थी हाईस्कूल की परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 83 विद्यालय ऐसे हैं जिनका परीक्षा परिणाम 20 फीसदी से भी कम है। सहायता प्राप्त 4531 में से 16 विद्यालयों का रिजल्ट 20 प्रतिशत से कम है। वहीं कुल17901 निजी स्कूलों के विद्यार्थी हाईस्कूल की परीक्षा में शामिल हुए। इनमें से 138 स्कूलों का रिजल्ट 20 प्रतिशत से कम है। हालांकि इंटरमीडिएट में राजकीय और सहायता प्राप्त विद्यालयों का परिणाम निजी विद्यालयों की तुलना में बेहतर है।
राजकीय विद्यालयों का उत्तीर्ण प्रतिशत 85.73 तथा सहायता प्राप्त विद्यालयों का 85.65 फीसदी रहा। वित्तविहीन विद्यालयों का उत्तीर्ण प्रतिशत 81.26 है। कुल 667 राजकीय इंटर कालेजों में एक स्कूल का परिणाम 20 से कम रहा। सहायता प्राप्त 4042 में से छह का रिजल्ट 20 फीसदी से कम है। वहीं 10061 वित्तविहीन विद्यालयों में 95 का रिजल्ट 20 प्रतिशत से कम रहा।