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छह करोड़ या अधिक के कारोबारी पर ही एक्साइज ड्यूटी

Wed, 16 Mar 2016 01:48 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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सराफा व्यवसायी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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एक्साइज ड्यूटी उन्हीं सराफा कारोबारियों पर लगेगी, जिनका टर्नओवर सालाना छह करोड़ या उससे अधिक होगा। रजिस्ट्रेशन भी ऐसे ही व्यापारियों को करना होगा। इससे कम का कारोबार करने वाले व्यापारी और कारीगर एक्साइज ड्यूटी के दायरे में नहीं होंगे। इसके अलावा जिन व्यापारियों का वित्तीय वर्ष 2015-16 में टर्नओवर 12 करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें भी रजिस्ट्रेशन कराना होगा। खास यह कि विभाग के अधिकारी शोरूम, दुकानों, कारीगरों के पास नहीं जाएंगे, न ही व्यापारियों को कार्यालय आना पड़ेगा, क्योंकि रजिस्ट्रेशन, स्टॉक घोषणा, रिटर्न दाखिल करने आदि की सभी व्यवस्था ऑनलाइन होगी।
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एक्साइज ड्यूटी के विरोध में सराफा व्यापारियों की चल रही हड़ताल के बीच मंगलवार को केंद्रीय उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क एवं सेवाकर आयुक्त संजय राठी ने स्थिति स्पष्ट की। बताया कि व्यापारी 1986 तक लागू रहे गोल्ड कंट्रोल एक्ट का हवाला देकर परेशान हो रहे हैं, जबकि बीते 30 वर्ष में स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। एक्साइज ड्यूटी मैन्यूफैक्चरिंग पर लगाई गई है और बेहद सरलीकृत है। इसके लिए व्यापारियों को कार्यालय आने की जरूरत ही नहीं है। रजिस्ट्रेशन व्यवस्था ऑनलाइन है। एक्साइज ड्यूटी के भुगतान और रिटर्न भरने के लिए भी विभाग आने की जरूरत नहीं है। बताया कि इसमें अधिकारियों का किसी तरह का हस्तेक्षप नहीं होगा, क्योंकि अधिकारियों को निर्देश है कि निर्माताओं के परिसर का दौरा न करें। इसके बाद भी अगर अधिकारी शोरूम, दुकानों या कारीगरों के पास जाते हैं तो इसकी शिकायत सीधे कमिश्नर से की जा सकती है। व्यापारी का नाम गुप्त रखते हुए अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

आयुक्त श्री राठी ने बताया कि चांदी के आभूषणों पर (हीरे, रूबी, रत्न और मणि जड़ित को छोड़कर) एक्साइज ड्यूटी लगेगी। कारीगर एवं ऐसे व्यापारी जो जॉब वर्क के आधार पर आभूषण तैयार करते हैं, उन्हें न रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत है और न ही एक्साइज ड्यूटी देना होगा। यह जिम्मेदारी प्रधान निर्माताओं को पूरी करनी होगी। बताया कि मार्च 2016 या वित्तीय वर्ष 2016-17 के लिए एसएसआई छूट प्राप्त करने के लिए निर्माताओं को सीए से वर्ष 2014-15 एवं 2015-16 की एकाउंट बुक के आधार पर जारी प्रमाण पत्र देना होगा। इसके साथ वैकल्पिक केंद्रीकृत रजिस्ट्रेशन की भी सुविधा है, ताकि अलग-अलग निर्माण परिसरों के लिए अलग से रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत न हो। बताया कि एक्साइज ड्यूटी का भुगतान प्रत्येक निकासी पर नहीं बल्कि हर माह करना होगा। इसके तहत मार्च 2016 के लिए पहली किस्त 31 तक जमा करनी होगी।
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गोल्ड कंट्रोल एक्ट वर्ष 1986 के पहले तक लागू था। इसके तहत तय मात्रा से अधिक सोना-चांदी रखने पर कार्रवाई का प्रावधान था। उस दौरान इस एक्ट का काफी गलत इस्तेमाल हुआ। इससे टैक्स तो काम आता था लेकिन कारोबारियों के उत्पीड़न की शिकायतें ज्यादा थी। इसलिए गोल्ड कंट्रोल एक्ट खत्म किया गया।
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