गो माता राष्ट्र माता प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत बुधवार को शंकराचार्य शिविर के सामने मौन व्रत रखने के बाद उन्होंने कहा, जितनी जल्दी पहला कदम बढ़ा लिया जाएगा, उतनी जल्दी लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक अन्य कदम भी बढ़ाने की शुरुआत हो जाएगी।
रामा (गो) को राष्ट्रमाता के आसन पर विराजमान कराने के क्रम में गो संसद में पारित प्रस्ताव सनातनियों का पहला कदम है। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा, प्रथम गो संसद में पारित प्रस्तावों के प्रत्येक बिंदु पर सनातनी समाज को चिंतन-मनन करके उसे आचरण में उतारना होगा। जब तक पहला कदम नहीं बढ़ेगा, तब तक लक्ष्य तक पहुंचने की शुरुआत नहीं होगी।
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बुधवार को गो माता राष्ट्र माता प्रतिष्ठा आंदोलन के तहत बुधवार को शंकराचार्य शिविर के सामने मौन व्रत रखने के बाद उन्होंने कहा, जितनी जल्दी पहला कदम बढ़ा लिया जाएगा, उतनी जल्दी लक्ष्य प्राप्ति के लिए आवश्यक अन्य कदम भी बढ़ाने की शुरुआत हो जाएगी। रामा गो के संरक्षण और संवर्धन को हम सब को अपना नैतिक दायित्व मान कर इस दिशा में बढ़ना होगा।
नवसंवत्सर के पहले सभी से गो हत्या करने वालों को चिह्नित करने का आह्वान करते हुए शंकराचार्य ने कहा, यह महापाप है। इसका समर्थन करने वाले भी पाप के भागीदार हैं। उन्हीं राजनीतिक दलों को वोट दें, जिन्होंने शपथपत्र में सरकार बनते ही पहला निर्णय रामा गो के सम्मान और अभयदान का करने का स्पष्ट सार्वजनिक उद्घोष किया है।