इलाहाबाद। महराजगंज की फरेंदा विधानसभा के उपचुनाव के लिए जारी अधिसूचना पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कोर्ट ने यूपी के लोकायुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। लोकायुक्त के साथ भारत निर्वाचन आयोग और उत्तर प्रदेश सरकार से तीन सप्ताह में जवाब मांगा है। विधायक बजरंग बहादुर सिंह ने याचिका दाखिल कर उपचुनाव की अधिसूचना को चुनौती दी थी। एक अन्य बर्खास्त विधायक उमाशंकर सिंह को सर्वोच्च न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त है।
बजरंग बहादुर की याचिका पर न्यायमूर्ति वीके शुक्ल और न्यायमूर्ति डीके अरोड़ा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। प्रकरण पर अगली सुनवाई 21 अप्रैल को होगी। बजरंग बहादुर पर विधायक चुने जाने के बाद सड़क निर्माण का ठेका लेने का आरोप था। इसकी जांच लोकायुक्त उत्तर प्रदेश ने की। लोकायुक्त की संस्तुति पर निर्वाचन आयोग से राय ली गई। फिर राज्यपाल ने फरेंदा विधान सभा सीट से विधायक का निर्वाचन रद कर दिया। उनके साथ ही रसड़ा विधानसभा के विधायक उमाशंकर को भी अयोग्य करार दिया गया। दो रिक्त विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए निर्वाचन आयोग ने 12 मार्च 2015 को अधिसूचना जारी कर दी।
उमाशंकर सिंह ने इसके खिलाफ हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में याचिका दाखिल की थी जो खारिज हो गई। वह सुप्रीम कोर्ट चले गए। सर्वोच्च न्यायालय ने उपचुनाव पर रोक लगाते हुए प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष ले जाने का निर्देश दिया। बजरंग बहादुर का प्रकरण भी एक समान होने के कारण हाईकोर्ट ने उपचुनाव पर रोक लगा दी है। याचिका में विधायक ने 29 जनवरी 2015 को अयोग्य करार दिए जाने संबंधी आदेश को चुनौती दी है।