आरोप है कि इसके बाद प्रकरण की विस्तृत जांच में यह बात सामने आई कि रश्मिकला का प्रमाणपत्र विद्यालय प्रबंध समिति के सदस्य बृजेश पाठक ने मंडलीय संयुक्त शिक्षा निदेशक, कामता राम पाल का फर्जी हस्ताक्षर कराकर एवं फर्जी सरकारी पदनाम (संयुक्त शिक्षा निदेशक, विंध्याचल मंडल, मिर्जापुर) की मुहर बनाकर बनाया है। इस संबंध में प्राप्त आख्या के मुताबिक, अंशकालिक सहायक अध्यापिका को 10 जुलाई 2016 से 31 मार्च 2020 तक कार्यरत दर्शाया गया है, जो कूटरचित है। प्रधानाचार्य पद के लिए अनुभव प्रमाण पत्र इस कार्यालय से निर्गत नहीं किया गया है। साथ ही जो अनुभव प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया गया है, वह कूटरचित व फर्जी है।
खुद कर लिया जेडी का हस्ताक्षर
तहरीर में अभ्यर्थी राम प्रकाश के संबंध में बताया गया है कि उनके अनुभव प्रमाणपत्र के सत्यापन के संबंध में पत्राचार पर संबंधितों की ओर से अवगत कराया गया कि रामप्रकाश के अनुभव प्रमाण पत्र की छायाप्रति में संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल का जो हस्ताक्षर है, वह कूटरचित है। इस क्रम में अभ्यर्थी रामप्रकाश ने बताया कि उक्त अनुभव प्रमाण पत्र उन्होंने स्वयं संयुक्त शिक्षा निदेशक कार्यालय से प्राप्त किया है।
प्रमाण पत्र पर कूटरचित हस्ताक्षर हैं, इस संबंध में उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके बाद विस्तृत जांच में यह बात सामने आई कि अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र के सत्यापन के संबंध में पूर्व में ही जिला विद्यालय निरीक्षक, फतेहपुर के माध्यम से आख्या प्राप्त की गई थी। इसमें तत्कालीन जिला विद्यालय निरीक्षक फतेहपुर के हस्ताक्षर की पुष्टि की गई थी, लेकिन अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र में संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज के हस्ताक्षर को कूटरचित होने के कारण असत्यापित किया गया था।
इस प्रकार यह आशंका है कि संबंधित अभ्यर्थी के अनुभव प्रमाण पत्र पर संयुक्त शिक्षा निदेशक, प्रयागराज मंडल, प्रयागराज के कूटरचित हस्ताक्षर संबंधित अभ्यर्थी के ही स्तर पर किया गया है। प्रभारी सिविल लाइंस रामाश्रय यादव ने बताया कि तहरीर के आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।