दीपांशु, चिंतामणि और अशोक कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि संतलाल गंभीर रूप से झुलस गया था। ग्रामीणों ने 112 नंबर एवं कोरांव पुलिस को सूचना दी लेकिन घटना के एक घंटे बीत जाने के बाद भी कोई मौके पर नहीं पहुंचा। इससे ग्रामीण नाराज हो गए। आक्रोशित ग्रामीणों ने तीनों शवों को बड़ोखर-देवघाट मार्ग पर रखकर चक्काजाम कर दिया।
चक्काजाम की सूचना पर प्रभारी निरीक्षक कोरांव, उपजिलाधिकारी कोरांव शुभम श्रीवास्तव, तहसीलदार कोरांव विशाल कुमार शर्मा आदि अधिकारी मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझा-बुझाकर चक्काजाम खत्म कराया। उन्होंने परिजनों को पूरी मदद का आश्वासन दिया। घायल संतलाल को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोरांव भेजा, जहां डॉक्टरों ने उसे गंभीर बताते हुए जिला अस्पताल रेफर कर दिया। इसके बाद अपर जिलाधिकारी प्रशासन भी मौके पर पहुंचे।
पुलिस ने तीनों मृतकों के शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। दोपहर बाद सांसद प्रयागराज डॉ. रीता बहुगुणा जोशी और विधायक कोरांव राजमणि मौके पर पहुंचे और मृतकों के परिजनों से मिल सहानुभूति प्रकट की। सांसद ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा दिलाए जाने एवं जर्जर विद्युत तारों का नवीनीकरण कराए जाने का आश्वासन दिया। इस मौके पर भारतीय किसान यूनियन लोक शक्ति के ललन सिंह पटेल आदि ने भी पहुंचकर शोक संवेदना प्रकट की।
दशकों पुराने जर्जर खंभों और तारों के जरिये विद्युत आपूर्ति
कोरांव के देवघाट स्थित विद्युत सब स्टेशन से बड़ोखर फीडर के लिए बीते वर्ष नए खंभे एवं तार लगाए गए हैं, लेकिन खेतरपलिया, गाढ़ा, अमिलिया, पूर्वीडोल, बरौंहा, हरदिहा, कालूपुर, लखनपुर, बांस समेत दर्जनों गांवों में दशकों पुराने खंभों और जर्जर तारों के सहारे ही आपूर्ति की जा रही है। कई जगहों पर खंभों के टूटने पर लकड़ी की बल्ली के सहारे ही हाई वोल्टेज करंट दौड़ रहा है, जिससे कभी भी हादसा हो सकता है। ग्रामीण अक्सर शिकायत करते हैं लेकिन कभी कोई कार्रवाई नहीं होती।