अप्रैल 2022 से ही थे पैरोल पर, 12 मई को फिर गए थे जेल
पूर्व विधायक उदयभान करवरिया पिछले साल 12 मई को जेल भेजा गया था। इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत अर्जी खारिज होने के बाद 12 मई को वह नैनी सेंट्रल जेल में फिर पहुंच गया था। आजीवन कारावास की सजा मिलने के बावजूद अप्रैल 2022 से पैरोल पर छोड़े जाने के खिलाफ जवाहर पंडित के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
विधायक जवाहर पंडित की हत्या में उम्रकैद की सजा पाए भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की पैरोल (अंतरिम जमानत) 12 मई को खत्म हुई थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत अर्जी खारिज करते हुए 12 मई को नैनी सेंट्रल जेल में रिपोर्ट करने का आदेश दिया था। आजीवन कारावास की सजा मिलने के बावजूद उदयभान करवरिया को अप्रैल 2022 से पैरोल पर छोड़े जाने के खिलाफ विपक्षीगण ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इसमें लंबे वक्त तक पैरोल दिए जाने का विरोध किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति सही मानी और फिर प्रकरण इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचा। जिसके बाद उदयभान की नियमित जमानत पर सुनवाई हुई थी।
हाईकोर्ट में विपक्षीगण ने सबूत के साथ कहा कि उदयभान इलाज कराने के नाम पर हासिल पैरोल का दुरुपयोग कर रहा है। वह पार्टियों में जा रहा है, आपराधिक लोगों से भी मुलाकात कर रहा है। इसके बाद हाईकोर्ट ने उसकी जमानत याचिका निरस्त करते हुए 12 मई को नैनी जेल प्रशासन के रिपोर्ट करने का आदेश दिया था। 1996 में हुए विधायक जवाहर पंडित हत्याकांड में उदयभान करवरिया, उसके भाई सूरजभान करवरिया और कपिलमुनि करवरिया को आजीवन कारावास की सजा हुई है।