पार्टी ने इलाहाबाद सांसद उज्ज्वल रमण सिंह को यहां का पर्यवेक्षक बनाया है। उज्ज्वल रमण सपा से लोकसभा चुनाव के ऐन पहले ही कांग्रेस में आए थे। चुनावी इतिहास बताता है कि फूलपुर सीट (2012 के चुनाव से पहले नाम झूंसी था) पर कांग्रेस बीते चार दशक में कोई करिश्मा नहीं दिखा सकी है। यहां से 1985 में महेंद्र प्रताप सिंह जीते थे। इसके बाद महेंद्र भी जनता दल में चले गए और जीते भी।
1989 के इस चुनाव में कांग्रेस इस चुनाव में उपविजेता रही थी। यही आखिरी चुनाव था, जब कांग्रेस प्रत्याशी ने दूसरा स्थान पाकर जमानत बचा ली। इसके बाद सभी चुनावों में कांग्रेस का बुरा हाल रहा। 2022 के चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धनाथ मौर्य को सिर्फ 1626 वोट ही हासिल हुए। वह चौथे स्थान पर रहे। कांटे के इस मुकाबले में सपा के मुज्तबा सिद्दीकी 2732 मतों से भाजपा के प्रवीण पटेल के हाथों हार गए थे।
1993 में खुला था सपा का खाता, चार बार हासिल की जीत
फूलपुर में कांग्रेस के मुकाबले सपा का प्रदर्शन दमदार रहा है। 1993 में जवाहर पंडित ने सपा का खाता खोला था। उनकी हत्या के बाद 1996 में उनकी पत्नी विजमा यादव लगातार दो बार जीतीं। 2007 में प्रवीण पटेल ने बसपा के टिकट पर जीत हासिल की। लेकिन, 2012 में फिर सपा के सईद अहमद ने बाजी मार ली। इसके बाद कुर्मी बाहुल्य इस सीट पर सपा जीत का स्वाद चखने के लिए बेचैन है। मजबूत स्थिति देख पार्टी के कई नेता टिकट के लिए हाईकमान तक सिफारिशें भी लगा रहे हैं।
फूलपुर सीट पर सपा और कांग्रेस की स्थिति
वर्ष सपा कांग्रेस
2022 1,00,825 - उपविजेता 1626
2017 67299 - उपविजेता सपा को समर्थन
2012 72898 - विजेता 6424
2007 42,853 - उपविजेता 8189