इस हिसाब से देखा जाए तो प्रतिदिन अगर एक हजार साल स्लीपर की आपूर्ति होगी तब यह लक्ष्य पूरा हो सकेगा। लेकिन पखवारे भर में दो चरणों में जहां 56 हजार साल स्लीपर पास किए जाने का लक्ष्य था, वहीं अब तक यह संख्या सैकड़ों में ही पहुंच सकी है। मुख्य अभियंता एके द्विवेदी का कहना है कि अभी तक जो स्लीपर छांटे गए हैं, उनकी लोडिंग शुरू करा दी गई है। जल्द ही आपूर्ति शुरू करा दी जाएगी। रही बात खराब गुणवत्ता की तो जो स्लीपर पास करने योग्य होंगे, वहीं लिए जाएंगे। गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाएगा।
पांटून पुलों को दोबारा टेंडर 17 को
पांटून पुलों के लिए टेंडर में भी फर्मों के हिस्सा न लेने से काम पिछड़ने की आशंका है। 30 जुलाई को होने वाले टेंडर में एक भी कंपनी ने हिस्सा नहीं लिया था। अब यह टेंडर 17 जुलाई को फिर कराया जाएगा। मुख्य अभियंता का करना है कि समीक्षा कराई जा रही है, समय रहते सभी काम पूरे कराए जाएंगे।