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समय पर इलाज न मिलने से गई फुटबालर अनूप की जान

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समय पर इलाज न मिलने के कारण सदर बाजार निवासी फुटबाल खिलाड़ी अनूप सोनकर की जान चली गई। कोरोना का खौफ और लॉक डाउन की पाबंदियां अंतर्जनपदीय स्तर स्तर के खिलाड़ी के जान पर भारी पड़ीं। परिजन और दोस्त गंभीर हालत में अनूप को लेकर एक से दूसरे नर्सिंग होम तक भटकते रहे, लेकिन बृहस्पतिवार की रात उन्हें किसी ने भर्ती नहीं किया। आधी रात एक नर्सिंग होम संचालक ने उन्हें भर्ती तो किया लेकिन उपचार के दौरान उनकी सांस उखड़ गई।
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कैंट के सदर बाजार निवासी संगम लाल सोनकर के पुत्र 35 वर्षीय अनूप कुमार सोनकर छावनी स्पोर्टिंग के साथ कोरल क्लब और कई अंतरजनपदीय फुटबाल प्रतियोगिताओं में शामिल हुए। बुधवार रात उन्हें अचानक बैक पेन की शिकायत हुई। घरवालों ने उन्हें पास स्थित एक मेडिकल स्टोर पर बैठने वाले डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने कुछ दवाएं देकर विशेषज्ञ को दिखाने की सलाह दी।
अनूप को बृहस्पतिवार को कैंट अस्पताल ले गए। वहां लॉक डाउन के चलते ओपीडी बंद थी। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने कुछ जांचे लिखीं और दवाएं दीं। जांच रिपोर्ट मिलने में रात नौ बज गए। तब तक कैंट अस्पताल के डॉक्टर जा चुके थे और अनूप की हालत गंभीर हो गई थी।
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परिजनों के मुताबिक अनूप को लेकर वह नौ से 12.30 बजे तक भटकते रहे। एक के बाद दूसरे नर्सिग होम गए, छह स्थानों पर भर्ती करना तो दूर किसी ने परीक्षण तक नहीं किया। साथियों ने किसी परिचित की मदद से रात करीब एक बजे सिविल लाइंस के नर्सिंग होम में अनूप को भर्ती कराया। जहां उनकी हालत बिगड़ती चली गई। जिंदगी और मौत से संघर्ष करते हुए आखिर उनकी जान चली गई।
शुक्रवार सुबह द्रौपदी घाट पर अनूप का अंतिम संस्कार किया गया। उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए फुटबाल खिलाड़ियों के साथ परिवार के लोग शामिल रहे। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टरों की उपेक्षा और संवेदनहीनता से अनूप की जान चली गई। समय पर इलाज मिलता तो उनकी जान बच सकती थी।
खूब रोए परिजन, घर में कोहराम
फुटबाल खिलाड़ी अनूप की असमय हुई मौत पर परिजन खूब रोए। वह भाइयों में सबसे छोटे थे। घर में कोहराम मचा रहा। मां को रोता देख लोगों को कलेजा फट रहा था। घर में अनूप की मां शीला देवी, बड़े भाई नीरज, धीरज और अनिल सोनकर हैं। अनूप के भाई धीरज और अनिल भी फुटबाल खिलाड़ी है। खिलाड़ियों ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
0 निजी अस्पतालों में ओपीडी और भर्ती के साथ गंभीर मरीजों का इलाज किया जा रहा है। लॉक डाउन से विशेषज्ञों का ही नहीं स्टाफ का भी मूवमेंट बाधित है। फिर भी कोशिश होती है कि मरीज निराश होकर न जाएं, उन्हें उचित इलाज मिले। कोरोना संक्रमण से बचाव और लॉक डाउन का पालन करने के लिए बेहतर होगा कि रोगों की विशेषज्ञता वाले अस्पतालों में ही मरीज जाएं। उन्हें बेहतर उपचार सुविधा मिलेगी।- डॉ. सुशील सिन्हा, प्रदेश अध्यक्ष उप्र नर्सिंग होम एसोसिएशन
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