खाद्य सुरक्षा अधिनियम की भले ही पहले चरण में हवा निकल गई हो लेकिन आगामी विधानसभा चुनाव का असर इस पर साफ दिख रहा है। खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सिर्फ गेहूं और चावल दिए जाने का प्रावधान है। अब प्रदेश सरकार ने पात्र राशनकार्ड धारकों को इस बार चीनी उपलब्ध कराने का फैसला किया है। आवंटित चीनी गोदामों तक पहुंचा दी गई है।
प्रति कार्ड 900 ग्राम चीनी कार्डधारकों को दी जाएगी। हालांकि यह चीनी पात्र गृहस्थियों के लिए पर्याप्त नहीं है। परिवार में पांच सदस्य हों या दस, सबको नौ-नौ सौ ग्राम चीनी दी जाएगी। कोटेदार चीनी के वितरण को लेकर परेशान हैं, क्योंकि बड़ी संख्या में पात्र गृहस्थियां यानि राशनकार्ड पात्रता सूची से बाहर हो गए हैं। खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट के अनुसार जिले में पात्र गृहस्थियों को चयनित किए जाने का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है जबकि हजारों परिवारों की अब तक ऑनलाइन फीडिंग नहीं हो सकी है। वेबसाइट पर प्रविष्टि बंद हो जाने के कारण चयनित पात्र गृहस्थियां अपात्र की श्रेणी में आ गए हैं।
ऐसे में वितरण के दौरान अगर वे चीनी के लिए दावा करते हैं तो भी कोटेदार उन्हें चीनी नहीं दे सकेगा। साथ ही पात्र गृहस्थियों से इतर एपीएल कार्डधारकों को भी चीनी नहीं मिलेगी। जिन्होंने खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत ऑनलाइन आवेदन किया है, उन्हें भी इस लाभ से वंचित होना पड़ेगा। ऐसे में हंगामा हो सकता है। आपूर्ति विभाग की ओर से भी स्पष्ट नहीं किया गया है कि चीनी किस आधार पर बांटी जाएगी। कोटेदारों से सिर्फ इतना कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित पात्र गृहस्थियों को चीनी का वितरण कर दें। स्थिति स्पष्ट न होने के कारण वितरण के दौरान घपले की आशंका भी बनी हुई है। विभाग की ओर से इसकी मॉनीटरिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं की गई है। अब तक सिर्फ यही स्पष्ट किया गया है कि चीनी अंत्योदय रेट पर उपलब्ध कराई जाएगी।